उर्दू कारवाँ के तत्वावधान में मुंबई के खिलाफ़त हाउस में ’अशरा-ए-उर्दू’ का शानदार एवं सफल समापन | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

उर्दू कारवाँ के तत्वावधान में मुंबई के खिलाफ़त हाउस में ’अशरा-ए-उर्दू’ का शानदार एवं सफल समापन | New India Times

मुंबई में उर्दू कारवाँ नामक पंजीकृत एवं सक्रिय संस्था द्वारा आयोजित ’अशरा-ए-उर्दू’ के अंतर्गत आयोजित हुई विभिन्न 10 दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला में समापन समारोह का आयोजन 05 दिसम्बर 2025, शुक्रवार को मौलाना मोहम्मद अली जौहर हॉल, ख़िलाफत हाउस, बायखला, मुंबई में महानगर के बुद्धिजीवी एवं प्रबुद्ध वर्ग, विशिष्ट एवं विद्वान हस्तियों की उपस्थिति में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों से संबद्ध प्रतिष्ठित व्यक्तियों, अध्यापकों, साहित्यकारों, विद्यार्थियों तथा उर्दू प्रेमियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर मातृभाषा उर्दू के प्रति अपने समर्पित भाव का परिचय दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई के प्राचीन एवं प्रतिष्ठित उर्दू दैनिक हिन्दुस्तान डेली के प्रधान संपादक एवं अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी, मुंबई के चेयरमैन जनाब सरफ़राज़ आरज़ू ने की। मुख्य अतिथि के रूप में जनाब रईस क़ासिम शेख (विधायक, महाराष्ट्र) ने समारोह की गरिमा बढ़ाई।

विशिष्ट अतिथि के रूप मेंजनाब सैय्यद हसीन अख्तर साहब (कार्यावाहक अध्यक्ष, महाराष्ट्र स्टेट उर्दू साहित्य अकादमी) तथा खानदेश क्षेत्र की प्रसिद्ध राजनीतिक–सामाजिक–साहित्यिक शख्सियत जनाब अब्दुल करीम सालार (अध्यक्ष, इकरा एजुकेशन सोसाइटी, जलगाँव) विशेष रूप से उपस्थित रहे। सम्मानित अतिथि के रूप में मोहतरमा डॉ. मसर्रत फ़िरदौस एवं उर्दू कारवाँ के संस्थापक सदस्य शेख मोहम्मद अबरार (औरंगाबाद) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

पहला सत्र : “महाराष्ट्र में उर्दू की प्रगति में मराठी समाज का योगदान” विषय पर परिचर्चा का आयोजन पर बुद्धिजीवियों ने रखे विचार

पहले सत्र में आयोजित बहुत संजीदा वैचारिक गोष्ठी में उर्दू कारवाँ के प्रेरक एवं अध्यक्ष जनाब फ़रीद अहमद ख़ान ने उर्दू–मराठी संबंधों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मराठी समाज ने सदैव उर्दू भाषा और साहित्य के विकास में सकारात्मक, समन्वयकारी और सहयोगी भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्तमान समय में दोनों भाषाओं के सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भाषाई सौहार्द की आवश्यकता को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तर्कपूर्ण रूप से रेखांकित किया।

महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी मुंबई के नवनियुक्त अध्यक्ष आली जनाब सैय्यद हसीन अख्तर ने कहा कि महाराष्ट्र में उर्दू की निरंतरता और मजबूती में मराठी समाज का परस्पर भाईचारे पर आधारित योगदान सदैव महत्वपूर्ण रहा है।

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में जनाब सरफ़राज़ आरज़ू ने विषय की समसामयिकता पर बल देते हुए इसे जनस्तर तक पहुँचाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कई ऐतिहासिक तथ्यों को साझा किया, जिन पर रिसर्च की आवश्यकता है।
विधायक रईस क़ासिम शेख ने अपने वक्तव्य में महाराष्ट्र की गंगा–जमुनी तहज़ीब को उर्दू के विकास की आधारशिला बताया।

मोहतरमा डॉ. मसर्रत फ़िरदौस ने भी विस्तृत विचार रखते हुए कहा कि महाराष्ट्र की क्षेत्रीय भाषाएँ स्वयं उर्दू से प्रभावित हुई हैं।यहाँ मराठी भाषी समाज का उर्दू के प्रति आदर–भाव और आत्मीयता सदैव प्रशंसनीय रही है।

दूसरा सत्र : विजेता विद्यार्थियों का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण

दूसरे सत्र में 10 दिवसीय’अशरा-ए-उर्दू’ के दौरान आयोजित की गई विभिन्न विविध प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले छात्र–छात्राओं, जज़ेज़ को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। विद्यार्थियों की प्रतिभा ने यह सिद्ध किया कि उर्दू का भविष्य नई पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित और उज्ज्वल है।

उर्दू कारवाँ की सेवाओं का व्यापक सम्मान

विशिष्ट अतिथियों एवं विद्वानों ने उर्दू कारवाँ की पिछले नौ वर्षों से निरंतर जारी शैक्षणिक, साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने मुंबई और महाराष्ट्र में भाषा एवं संस्कृति के संवर्धन की एक नई मिसाल कायम की है।

समापन अवसर पर उर्दू कारवाँ के अध्यक्ष जनाब फ़रीद अहमद ख़ान तथा कार्यकारिणी सदस्यों ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, निर्णायकों, सहयोगी संस्थाओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह भी घोषणा की गई कि संस्था भावी वर्षों में भी इसी उत्साह एवं निरंतरता के साथ शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।

उल्लेखनीय है कि ’अशरा-ए-उर्दू’ के विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं में मुंबई एवं महाराष्ट्र के 30 महाविद्यालयों के कुल तीन हज़ार से अधिक छात्र–छात्राओं ने सहभागिता कर इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता प्रदान करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के निर्णायकों और वक्ताओं को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिनके योगदान ने इस आयोजन को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया।

इस कार्यक्रम में जनाब मुशीर अहमद अंसारी, गुल बूटे की ओर से जनाब फ़ारूक़ सैयद, शिक्षकों के संगठन AITA के अनेक पदाधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के छात्र–छात्राएँ एवं अध्यापक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाया।

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