अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:
आइसा MNNIT इलाहाबाद में डॉ. वेंकटेश, जो अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं, के निलंबन और उन पर किए जा रहे जातिगत उत्पीड़न की कड़ी निंदा करता है। आइसा मांग करता है कि डॉ. वेंकटेश का निलंबन तत्काल वापस लिया जाए और जातिगत उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों पर अविलंब कार्रवाई की जाए।

प्रयागराज: मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNNIT) इलाहाबाद प्रौद्योगिकी और शोध के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित संस्थान है। इस संस्थान में अनुसूचित जनजाति के फैकल्टी की संख्या आरक्षण एवं सामाजिक न्याय संबंधी नियमों के अनुसार अत्यंत कम है। जहाँ संस्थान में एसटी वर्ग के 27 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं, वहाँ वर्तमान में मात्र 3 फैकल्टी ही कार्यरत हैं।
इन्हीं 3 फैकल्टी सदस्यों में से एक डॉ. वेंकटेश नायक को विभागीय मीटिंग की रिकॉर्डिंग करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। इस बेबुनियाद आरोप के आधार पर उन्हें 19 सितंबर 2025 से निलंबित कर उनके अकादमिक कार्य, पठन-पाठन और संस्थागत जिम्मेदारियों से वंचित कर दिया गया है। न केवल उनकी वेतन-भुगतान रोक दिया गया है बल्कि उनके प्रमोशन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी स्थगित कर दिया गया है। डॉ. वेंकटेश 2012 से MNNIT इलाहाबाद में सेवाएँ दे रहे हैं।
संस्थान के अधिकांश प्रशासनिक अधिकारी सवर्ण समुदाय से संबद्ध हैं। ऐसे में अनुसूचित जनजाति से आने वाले एक प्रोफेसर के साथ किया गया यह व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि यह एक वंचित समुदाय के फैकल्टी सदस्य के प्रति जातिगत और मानसिक उत्पीड़न को भी दर्शाता है। शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत उत्पीड़न की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। डॉ. वेंकटेश के साथ हो रहा उत्पीड़न भी रोहित वेमुला, पायल तडवी और दर्शन सोलंकी जैसे मामलों की तरह एक गंभीर मामला है।
नॉट फाउंड सूटेबल जैसी नीति और साक्षात्कार में बहिष्करण के माध्यम से आरक्षण तथा सामाजिक न्याय के मूल्यों को कमज़ोर किया जा रहा है। इसके साथ ही संस्थानों में जातिवादी मानसिकता के तहत उत्पीड़न को बढ़ावा मिलने से वंचित समुदायों का प्रतिनिधित्व निरंतर घट रहा है।
आइसा मांग करता है कि डॉ. वेंकटेश का निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और उनके साथ किए जा रहे जातिगत एवं मानसिक उत्पीड़न के लिए ज़िम्मेदार MNNIT इलाहाबाद के प्रशासनिक अधिकारियों पर SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही डॉ. वेंकटेश की सभी अकादमिक एवं संस्थानिक ज़िम्मेदारियों को बहाल किया जाए तथा उनके रुके हुए वेतन को तुरंत जारी किया जाए।
इसके अतिरिक्त, आइसा यह भी मांग करता है कि संस्थान में आरक्षण और सामाजिक न्याय संबंधी नियमों का पालन करते हुए खाली पड़े सभी पदों को तत्काल भरा जाए तथा प्रशासनिक अधिकारियों को सामाजिक संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

