मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

जहां मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल पंचायत राज व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए बिल, भुगतान, वर्क आदि सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायतों में भ्रष्टाचार और बंदरबांट का खेल लगातार जारी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मैहर जिले के अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अमझर पंचायत में देखने को मिल रहा है।

सूत्रों के अनुसार, पंचायत ने एक वर्ष में लगभग ₹86,580 की मिठाई, ₹73,805 की स्टेशनरी, और 15 अगस्त 2025 के ध्वजारोहण हेतु ₹33,000 की खरीद दिखा दी। यह राशि अत्यधिक और संदिग्ध प्रतीत होती है। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए पंचायत द्वारा अपठनीय बिल पंचायत पोर्टल पर अपलोड किए गए, ताकि कोई भी विवरण स्पष्ट न हो सके।

सबसे गंभीर मामला यह है कि—
बिल क्रमांक 33, बिल जारी तारीख 12 मई 2025
लेकिन भुगतान दिनांक 12 फरवरी 2025, यानी बिल बनने से पहले ही भुगतान कर दिया गया।
इस बिल में उत्कर्ष स्वीट सेंटर को ₹5,700 का भुगतान दर्शाया गया।
इसी तरह बिल क्रमांक 218, बिल जारी तारीख 18 नवम्बर 2025
भुगतान दिनांक फिर वही 12 फरवरी 2025, यानी 9 महीने पहले ही ₹13,900 का पेमेंट गुप्ता मिष्ठान भंडार को कर दिया गया।
यह साफ दर्शाता है कि अमझर पंचायत में सरपंच और सचिव मिलकर फर्जी बिलों के माध्यम से लाखों रुपये हड़पने में लगे हुए हैं। इसके अलावा कम्प्यूटर मरम्मत में ₹9,960 और ₹7,440, कुल ₹17,400 खर्च दिखाया गया, जो वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
इन सभी घोटालों को छिपाने के लिए जानबूझकर अपठनीय बिल पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड किए गए। ऐसा प्रतीत होता है कि सरपंच और सचिव को न तो मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री का डर है, न ही जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी सतना, कलेक्टर मैहर या आयुक्त रीवा का। बिना हिचकिचाहट लाखों रुपये की बंदरबांट कर दी गई।
अब देखना यह है कि इस गंभीर मामले पर कलेक्टर मैहर, जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी सतना और आयुक्त रीवा क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी अपठनीय बिलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

