लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर पर लगा मानव अंग तस्करी का सनसनीखेज़ आरोप | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के चिकित्सा जगत में आज उस समय सनसनी फैल गई, जब एक प्रतिष्ठित और सुस्थापित संस्थान लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेन्टर पर मानव अंग तस्करी और गैर-पंजीकृत (अवैध) प्रत्यारोपण जैसी अत्यंत जघन्य और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप लगे। मामले की असाधारण गंभीरता को देखते हुए, मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से आपराधिक मुकदमा दर्ज करने सहित कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने का आदेश जारी कर दिया है।

लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर पर लगा मानव अंग तस्करी का सनसनीखेज़ आरोप | New India Times

यह पूरा प्रकरण छिंदवाड़ा जिले के परासिया निवासी एवं अपने व्यापक सामाजिक कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले, जागरूक समाज सेवक रिंकू रितेश चौरसिया के अथक और निर्भीक प्रयासों का परिणाम है।
चौरसिया ने संपूर्ण साक्ष्य प्रमाणों  सहित अपनी विस्तृत शिकायत सीधे भारत सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली को प्रेषित की थी। दिल्ली से प्राप्त इन गंभीर साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर ही मध्यप्रदेश सरकार ने चिकित्सा माफिया के खिलाफ यह निर्णायक कदम उठाया है।
शासकीय पत्र का विवरण:
जारीकर्ता: अवर सचिव, श्रीमती सीमा डहेरिया, मध्यप्रदेश शासन।
दिनांक: 23 अक्टूबर 2025।
  पत्र क्रमांक: PHME-0043/2024/सत्रह/मेडि-3।
निर्देश: पत्र में आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA), 1994 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत ‘तत्काल और नियमानुसार आवश्यक वैधानिक  एवं दण्डात्मक  कार्यवाही’ सुनिश्चित करें।काला कारोबार उजागर करने वाले समाज सेवक
शिकायतकर्ता समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया की यह पहल न केवल चिकित्सा क्षेत्र के एक बड़े काले कारोबार को उजागर करती है, बल्कि यह उनके विगत 15 वर्षों के निःस्वार्थ सामाजिक समर्पण की निरंतरता को भी दर्शाती है।
सामाजिक रिकॉर्ड: उनके कार्यों में 2080 यूनिट से अधिक रक्तदान कराना (पीड़ित मरीजों के लिए), पर्यावरण संरक्षण हेतु 9500 पौधे रोपण करना, और निर्धन/गरीबों को 5000 कंबल वितरित करना शामिल है।
तीव्र आरोप: यह स्पष्ट है कि लायंस आई हॉस्पिटल पर लगे आरोप मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA), 1994 की गंभीर धाराओं के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं, जिसके तहत दोषी पाए जाने पर कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
लायंस क्लब पर आपराधिक इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल कानूनी घेरे में आया है।
पूर्व का मामला: राष्ट्रीय अंधत्व निवारण मिशन (भारत सरकार की योजना) के तहत, संस्था पर फर्जी बिल लगाकर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि की उगाही करने का आरोप है।
* जाँच का खुलासा: श्री चौरसिया द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कराए गए खुलासे में विगत 5 वर्षों के 17,958 ऑपरेशनों में से केवल 23% ऑपरेशन ही सत्य पाए गए।
* परिणाम: इस मामले में सरकार द्वारा लायंस क्लब के सात पदाधिकारियों के खिलाफ थाना परासिया में FIR दर्ज कराई गई थी, जिसका मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय जबलपुर में विचाराधीन है।
मांग: त्वरित और निष्पक्ष जाँच
लायंस आई हॉस्पिटल जैसे प्रसिद्ध संस्थान पर एक साथ ‘मानव अंग तस्करी’ और ‘सरकारी फंड की हेराफेरी’ जैसे संगीन आरोप लगना यह दर्शाता है कि चिकित्सा क्षेत्र में आपराधिक तत्वों का नेक्सस कितना गहरा हो चुका है।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन पर अब यह सुनिश्चित करने का बड़ा दबाव है कि:
जाँच निष्पक्ष, त्वरित और THOTA, 1994 के प्रावधानों के तहत हो।
मानव अंगों के अवैध व्यापार में शामिल सभी दोषियों और संस्थानों पर आपराधिक मुकदमा  एफ.आई.आर. दर्ज हो और उन्हें कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिले।
आगे की कार्रवाई: आयुक्त की विस्तृत जाँच रिपोर्ट और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की प्रतिलिपि जल्द ही सार्वजनिक होगी।

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