नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

घरकुल घोटाले के कारण राजनीत से दूर हो चुके पूर्व मंत्री सुरेश जैन के फिर से सक्रिय होने की खबरों ने बीजेपी के कैंप मे हड़कंप मचा दिया है। सुरेश जैन और एकनाथ खडसे इन दोनो नेताओं पर तत्कालीन परिस्थितियों मे थोपी गई अलिप्ततावादी भूमिका का सीधा फायदा बीजेपी को मिला। इसमें मोदी-फडणवीस सरकार के प्रभाव ने अहम भूमिका निभाई। बीजेपी के गिरीश महाजन 10 साल से सरकार में कैबिनेट मंत्री है बावजूद इसके जलगांव का ठोस औद्योगिक विकास नहीं हो पाया है। जिले के सभी 15 ब्लॉक उद्योग रोजगार खेती किसानी में काफ़ी पिछड़ गए है। सत्ता के दम पर विपक्ष को तोड़ने का आरोप झेलती बीजेपी जनता के बीच इस आरोप का जवाब देने में विफल रही है। 283 फ़िर 303 वाला मोदी युग आज 240 के साथ कमजोर दौर से गुजर रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय राजनीति में यह संभावना मजबूत होती दिख रही है कि मोदी दौर ख़त्म हो कर आधुनिक भारत का नया सूरज खिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण नवंबर के आखरी हफ्ते में महाराष्ट्र में महानगर पालिका , जिला परिषद , पंचायत समिति , नगर परिषद , नगर पंचायत के आम चुनाव होने है। जलगांव जिला परिषद और जामनेर नगर परिषद का चुनाव सुरेश जैन के प्रमुख कयादत मे लड़ा गया तो बीजेपी के लिए एकतरफा जीत पाना आसान नहीं होगा। सूत्रों के मुताबिक जामनेर नगर परिषद के लोकनियुक्त अध्यक्ष की सीट जनरल के लिए आरक्षित घोषित कि गई है। सुरेश जैन के नेतृत्व मे गठबंधन की ओर से कोई नया चेहरा मैदान में उतरा जा सकता है।

