परसराम साहू, देवरी कलां-सागर (मप्र), NIT;
मुरलीधर मन्दिर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में यज्ञाचार्य पंडित गोविंद प्रसाद शास्त्री रसेना वाले ने कहा कि भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा कि यज्ञ से जो है सृष्टि होती है और यज्ञ के घोड़े से जब बादल बनते हैं ,तो समय पर अच्छी दृष्टि होती है और जब अच्छी दृष्टि होती है तो यह पृथ्वी धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाती है ,जब धान्य से परिपूर्ण हो जाती है तो दुर्भिक्ष जैसे संकट की स्थिति से यह मनुष्य जाति हमेशा के लिए तड़प आ जाती है। धन की प्राप्ति के लिए ही यज्ञ किया जाता है।
वातावरण की शुद्धि के लिए अभी वर्तमान में भारत वन स्थिति से गुजर रहा है तथा सूखा ,अतिवृष्टि अनावृष्टि स्थितियों से गुजर रहा है, इन समस्याओं की शांति के लिए ही हमारे महंत श्री108 हरि कृष्ण दास त्यागी जी ने संकल्प लिया है कि जब तक शरीर में प्राण रहेंगे, तब तक इस वायुमंडल की शुद्धि के लिए और समस्त प्रदेश और देश व देवरी नगर की आपत्ति और विपत्ति के निवारण के लिए हम यज्ञ करते रहेंगे। यज्ञ में सद्भाव प्रेम की स्थापना करने के लिए यह 19 वर्ष से चल रहा है। हमारे कथा व्यास पंडित श्री विपिन बिहारी साथी जी ने भरत चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में शांति सद्भाव मैत्री की आवश्यकता है। भरत जी जैसा भाई संसार में भाई हो नहीं सकता ,इसलिए भरत जी के चरित्र से निश्चित हम आप को यह शिक्षा लेना है कि हमारे प्रदेश और देश में सामंजस्य स्थापित हो और हम हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर एक दूसरे का साथ देते रहें। यज्ञ में ब्रह्मा के पद पर परम विद्वान पंडित श्री नरहरि जी शास्त्री जी वेद मंत्रों के द्वारा यहां पर यजमान मुख्य यजमानों के द्वारा यज्ञ में अनेक देवी देवताओं के नाम से और वेद मंत्रों से संपूर्ण यज्ञ मंडप का पूजन करवाते हैं साथ ही महायज्ञ में दुर्गा पाठ ,महा मृत्युंजय महामंत्र का जाप और देवी अंजनी के मूल मंत्र का जाप मंत्र गणेश मंत्र का जाप विश्व की शांति के लिए किया जा रहा है। यज्ञ के संयोजक सतीश राजोरिया यजमान सुरेन्द छोटू तिवारी ,अंशुल श्रीवास्तव है। यज्ञ सब की सदभावना एवम प्रदेश जिला जनपद नगर की शांति के लिए की शांति के लिए किया जा रहा है चारों तरफ धर्म का वातावरण बना हुआ है। यह यज्ञ दिनांक 11-01-2018 तक निरंतर चलता रहेगा। यज्ञ में अनेक भक्तों की भूमिका दान देने में है, यहां पर अनेक भक्त महाप्रसाद वितरण करने की व्यवस्था कर रहे हैं। यज्ञ में गोविंद शास्त्री रसेना वाले, ब्रम्हा नरहरि शास्त्री, गौतम बारोलिया अमोदा, राजेन्द छुट्टन गुरु, संजय स्वामी, सजंय दुबे, नंदकिशोर बिल्थरे, पुरुषोत्तम मिश्रा, गोपाल मिश्रा, चेतन्य दुबे, जगदेव, राजेन्द, जयशंकर कटारे, राजेश आदि महराजों द्वारा यज्ञ कराया जा रहा है।
