भोपाल नगर निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र हेतु नए नियम लागू: अब शपथ पत्र और पार्षद की मंजूरी अनिवार्य | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल नगर निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र हेतु नए नियम लागू: अब शपथ पत्र और पार्षद की मंजूरी अनिवार्य | New India Times

जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले परिजनों को दस्तावेज देने के बाद रसीद प्राप्त होती है फिर रसीद के बाद वार्ड प्रभारी के और वार्ड पार्षद के वेरीफाई के बाद शपथ पत्र भी देना होगा तब जाकर हस्ताक्षर होंगे। फिर वह कागज संबंधित जन्म मृत्यु शाखा को जमा होने के बाद स्कूटी में भी समय 10 से 15 दिन लगभग लिया जाता है।आपको ₹50 के शपथ पत्र पर यह बताना होगा की की मृत्यु और जन्म कब कहां कैसे हुआ है। सांख्यिकी विभाग के नियम लगभग सभी अस्पतालों और निगम कार्यालय में एक ही तरह के होते हैं।

लेकिन यहां कुछ हटके नगर निगम जन्म मृत्यु शाखा प्रभारी सत्य प्रकाश बढ़गयया के कुछ अपने नियम है जिसका लगभग विरोध हो रहा है। वह कहते हैं कि जहां सस्पेक्ट है केवल वहां नहीं हम हर मामले में शपथ पत्र हमारी मजबूरी है लेना। जैसा है कि पहले बता चुके तभी आप जन्म मृत्यु शाखा में पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 21 या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से संबंधित हो सकता है। दोनों के संदर्भ में मैं जानकारी प्रदान करता हूँ, क्योंकि प्रश्न में “जन्म मृत्यु” और “1971” का उल्लेख है, जो जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की ओर इशारा करता है, जबकि “धारा 21” संविधान के अनुच्छेद 21 से भी भ्रमित हो सकता है।

1. जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (Registration of Births and Deaths Act, 1969):
धारा 21: इस अधिनियम में धारा 21 का संबंध जन्म और मृत्यु रजिस्टर की प्रामाणिक प्रतियों से है। इसके तहत, रजिस्ट्रार द्वारा रखे गए जन्म और मृत्यु के रजिस्टर की प्रामाणिक प्रतियां (certified copies) प्रदान की जा सकती हैं। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि रजिस्टर में दर्ज जानकारी को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जा सके, जैसे कि जन्म प्रमाण पत्र या मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए।

विवरण: धारा 21 के तहत, कोई भी व्यक्ति, जिसके पास उचित कारण है, रजिस्ट्रार से जन्म या मृत्यु के रजिस्टर की प्रामाणिक प्रति प्राप्त कर सकता है, बशर्ते वह निर्धारित शुल्क का भुगतान करे और प्रक्रिया का पालन करे।
महत्व: यह धारा जन्म और मृत्यु के आधिकारिक रिकॉर्ड को पारदर्शी और सुलभ बनाती है, जो सरकारी योजनाओं, कानूनी कार्यवाही, और नागरिकता सत्यापन जैसे मामलों में उपयोगी है।

संदर्भ: जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत भारत में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य है। यह पंजीकरण घटना के स्थान के आधार पर किया जाता है, और राज्य सरकारें इसके लिए जिम्मेदार हैं।

1971 का संदर्भ: 1971 में इस अधिनियम में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ था, लेकिन यह वह समय था जब भारत में इस अधिनियम को लागू करने के लिए राज्य स्तर पर सुविधा तंत्र को मजबूत किया जा रहा था। उदाहरण के लिए, 1971 के आसपास कई राज्यों में मुख्य रजिस्ट्रार और जिला स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हुई थी।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (Article 21):
यदि आपका प्रश्न भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 से संबंधित है, तो यहाँ इसका विवरण है:

अनुच्छेद 21: यह अनुच्छेद भारत के प्रत्येक नागरिक और गैर-नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। इसमें कहा गया है कि “किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।

निजता का अधिकार: 2017 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले (जस्टिस के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत सरकार) में निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मूल अधिकार माना गया।

स्वास्थ्य का अधिकार: अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार भी शामिल है, जो जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

1971 का संदर्भ: 1971 में अनुच्छेद 21 के तहत कोई विशेष संशोधन नहीं हुआ था, लेकिन यह वह समय था जब भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान मानवाधिकारों, विशेष रूप से शरणार्थियों के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार, पर ध्यान दिया गया था। उदाहरण के लिए, पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए शरणार्थियों को भारत में शरण दी गई थी, और उनके अधिकारों की रक्षा अनुच्छेद 21 के तहत की जा सकती थी।

3.1971 और जन्म-मृत्यु के संदर्भ में:
1971 में भारत-पाक युद्ध और बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर नरसंहार हुए, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों की मृत्यु हुई और शरणार्थी भारत आए। इस दौरान जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना चुनौतीपूर्ण था, खासकर शरणार्थी शिविरों में। जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत भारत में शरणार्थियों के लिए भी जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अनिवार्य था, और इसके लिए विशेष शिविरों में रजिस्ट्रार नियुक्त किए गए थे।

स्पष्टीकरण की आवश्यकता: आपका प्रश्न अस्पष्ट है, क्योंकि “1971 1969 की धारा 21 जन्म मृत्यु से” में कई संदर्भ हो सकते हैं। कृपया स्पष्ट करें कि आप जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 21 के बारे में पूछ रहे हैं या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के बारे में, और क्या 1971 का कोई विशेष संदर्भ (जैसे युद्ध, शरणार्थी, या अन्य) है। यदि आप किसी अन्य विशिष्ट जानकारी की तलाश में हैं, जैसे कि 1971 में इस धारा के तहत कोई विशेष नियम, संशोधन, या घटना, तो कृपया और विवरण प्रदान करें।

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