नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में किए गए वोटर घोटाले का पर्दाफाश कर दिया तो बीजेपी के दफ़्तर आयोग का केबिन बन गए। सुप्रीम कोर्ट की मेहरबानी के कारण अब राज्य में तमाम निकायों के चुनाव होने हैं। राहुल के आरोपों के बाद महाराष्ट्र में सघन वोटर जांच अभियान चलाया जाना जरूरी हो जाता है जो महाराष्ट्र के बजाय बिहार में शुरू कर दिया गया है। चुनाव आयोग बिहार में चोर दरवाजे से NRC करवा रहा है। आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं होने के बाद भी वो हठवादी बना बैठा है। RJD महागठबंधन ने इसे वोटबंदी करार दिया है। आयोग के काम को Maharashtra DGIPR पेज पर सराहा जा रहा है।

लोकसभा चुनाव के पांच महीने बाद महाराष्ट्र में 40 लाख वोटर कैसे बढ़ गए ? राहुल गांधी को बूथ के CCTV फुटेज क्यों नहीं दिए जा रहे हैं ? चुनाव आयोग फेडरल डिजिटल वोटर्स लिस्ट सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा है ? महाराष्ट्र के सभी विधानसभा क्षेत्रों में 10 से 15 हजार वोटर्स तीन चार बार लिस्टेड हैं। ऐसे वोटर्स के नाम किसी भी एक लिस्ट में रखने के लिए चुनाव आयोग कोई जांच अभियान चलाएगा या नहीं? एक बात साफ़ होती नज़र आ रही है कि वोटर लिस्ट के फर्जीवाड़े से सेंगोल को बल दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नक्शे कदम पर चल रहे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता ने महाराष्ट्र वोटर घोटाले को लेकर आज तक एक भी खुली पत्रकार वार्ता नहीं की है।

