भिलौरी गांव में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बुद्ध पूर्णिमा पर्व | New India Times

निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

भिलौरी गांव में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बुद्ध पूर्णिमा पर्व | New India Times

लार्ड बुद्धा नेशनल चैरिटेबल संस्था की ओर से सोमवार की रात्रि में क्षेत्र के भिलौरी उर्फ भिलौरा गांव में बुद्ध पूर्णिमा महापर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। सर्वप्रथम बौद्धाचार्य अनिल बौद्ध ने उपस्थित लोगों को त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कराया। वहीं डा.भीमराव अम्बेडकर जन जागरण मंच इन्द्री ग्रान्ट के कलाकारों ने गौतम बुद्ध के जीवनी की मनमोहक झलकियां प्रस्तुत की और मिशन गायिका माया बौद्ध के गीतों पर रातभर झूमने को मजबूर हुए श्रोता।

भिलौरी गांव में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बुद्ध पूर्णिमा पर्व | New India Times

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष राममिलन गौतम ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म में आस्था रखने वालों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह बैसाख माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था। ५६३ ई.पू. बैसाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी नामक वन में हुआ था। 80 वर्ष की आयु में 483 ई.पू. मे पूर्णिमा के दिन ही ‘कुशनारा’ में उनका महापरिनिर्वाण हुआ था। जिसे अब कुशीनगर के नाम से जाना जाता है। भारत में बुद्ध पूर्णिमा का काफी महत्व है। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं।

विशिष्ट अतिथि जिला उपाध्यक्ष डा.जेपी बौद्ध ने कहा कि इसी दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी। आज बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में १८० करोड़ से अधिक लोग हैं और इसे धूमधाम से मनाते हैं। यह त्यौहार भारत, चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान तथा विश्व के कई देशों में मनाया जाता है। बहुत ही तेजी से लोग बौद्ध धर्म को अपना रहे हैं। तहसील अध्यक्ष अनिल कुमार गौतम ने कहा कि बौद्ध धर्म मे बोधगया का बहुत ही महत्व है क्योंकि यही पर बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। लेकिन अफसोस है कि बोधगया अबौद्धों के कब्जे में है। जिसे मुक्त कराने के लिए तमाम बौद्ध भिक्षु सहित बौद्ध अनुयायी काफी दिनों से आंदोलनरत हैं। बिहार सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जयकिशोर गौतम ने कहा कि इस दिन बौद्ध अनुयायी अपने घरों में दीपक जलाते हैं और फूलों से घरों को सजाते हैं। काफी मात्रा में विश्व भर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और प्रार्थनाएँ व धर्म ग्रंथों का पाठ करते हैं। इस दिन बोधिवृक्ष पीपल की भी पूजा की जाती है। उसकी शाखाओं को हार व रंगीन पताकाओं से सजाते हैं। वृक्ष के आसपास दीपक जलाकर इसकी जड़ों में दूध व सुगंधित पानी डाला जाता है। पिंजरों से पक्षियॊं को मुक्त करते हैं व गरीबों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं। दिल्ली में स्थित बुद्ध संग्रहालय में इस दिन बुद्ध की अस्थियों को बाहर प्रदर्शित किया जाता है, जिससे कि बौद्ध धर्मावलंबी वहाँ आकर प्रार्थना कर सकें।

इस अवसर पर प्रधान प्रतिनिधि जितेन्द्र प्रताप सिंह, संतोष कुमार आजाद, राम सनेवर गौतम, राम निवास, बजरंगी गौतम, आन्ही प्रसाद, ध्रुपराज, परशुराम शास्त्री, विक्की, कल्लू गौतम, डा संजीव कुमार, राम अचल, मौला, गुरु प्रसाद, सीताराम, मनीराम, रामशंकर,राम प्रकाश, प्रभू,वृजमोहन, अवधराम, विदेशी, घनश्याम, राम सूरत, अखिलेश कुमार, गंगाराम, रविकुमार, अजय कुमार आदि लोग मौजूद रहे।

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