नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2012 में किए कपास आंदोलन से नेता बने गिरीश महाजन पर दिल्ली की नज़र पड़ चुकी है। एक यू ट्यूबर के शो के हवाले से पूर्व बीजेपी नेता एकनाथ खडसे ने गिरीश महाजन के चरित्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भय भ्रम और चरित्र हनन जैसे हथियारों की धार दूरगामी होती है। यू ट्यूबर ने देश के गृह मंत्री अमित शाह और गिरीश महाजन के संवाद को किस आधार पर सार्वजनिक किया पता नहीं। इस मामले में यू ट्यूबर के साथ लाइव पॉडकास्ट करने के बजाय गिरीश महाजन का गुस्सा खडसे पर फूट पड़ा। महाजन ने चेतावनी दी खडसे उनके संयम का अंत न देखे अगर वो मुंह खोलेंगे तो खडसे को जूते पड़ेंगे।

जब भी खडसे ने महाजन के चरित्र को लेकर टिप्पणी की आरोप लगाए तब महाजन ने खडसे के परिवार से जुड़ी किसी बात की ओर इशारा किया लेकिन बात नहीं बताई। महाराष्ट्र की जनता पूछ रही है कि आखिर वो कौनसी बात है जिसे महाजन इतने सालों से बोल नहीं पा रहे हैं। बेबाक निडर नेता के तौर पर पहचाने जाने वाले महाजन को आखिर किस बात का डर सता रहा है। खडसे-महाजन के इन व्यक्तिगत बयानों का जिले के विकास से कोई लेना देना नहीं है फिर भी गोदी मीडिया इसे विकसित भारत से जोड़ देता है। सुरेश जैन, एकनाथ खडसे के विकल्प बनकर उभरे गुलबराव पाटील और गिरीश महाजन के दस साल में जलगांव जिले का रत्तीभर भी विकास नहीं हुआ है। गिरीश महाजन का गृह नगर जामनेर बारामती की छांव के आसपास भी ठहर नहीं पाया है।

