बजट सत्र में सदन का अपमान, सरकार ने प्रशांत सोनवने को दिया संरक्षण | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बजट सत्र में सदन का अपमान, सरकार ने प्रशांत सोनवने को दिया संरक्षण | New India Times

जलगांव और नासिक लोकनिर्माण विभाग के चीफ़ इंजीनियर प्रशांत सोनवने के तबादले को सरकार ने रोक दिया है। बजट सत्र के दौरान सदन में विधायक एकनाथ खडसे ने विवादित कामकाज और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रशांत के तबादले की मांग की थी। सोनवने को छत्रपति संभाजी नगर औरंगाबाद में संभागीय कार्यालय के किसी एक टेबल पर पोस्टिंग दी गई थी। सोनवने आठ किस्म की प्रशासनिक जांच का सामना कर रहे हैं। सोनवने द्वारा इरादतन तरीके से हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित करने की बात खुले आम कही जा रही है। तबादले के आदेश को निष्प्रभ करने के लिए सोनवने मुंबई मंत्रालय में रुके हुए थे। किसी पंख कटे आका ने अपना रसूख दांव पर लगा कर सोनवने के तबादले के आदेश पर 20 दिन तक रोक लगा दी है।

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PWD में तेरा साल से एक हि जिले में जमे बैठे सरकारी मुलाजिम कहे जाने वाले एक इंजीनियर को लोकतंत्र के मंदिर से बड़ा साबित कर सरकार आखिर क्या संदेश देना चाहती है ? सिस्टम में सैकड़ों अधिकारी हो सकते हैं जो नेताओं के लिए नोट छापने की मशीन चलाने का काम कर रहे होंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर TEST TUBE चैनल हांकने वाले टाइम पास पत्रकार आपको चिलचिलाती धूप , तरबूज , ग़रीबों का फ्रिज यानी पानी के मटके जैसी फालतू बातों पर बोर करेंगे। लेकिन सिस्टम में बैठे प्यादों और उनके आकाओं पर एक ढंग की रिपोर्ट पेश करते नहीं दिखेंगे। हत्या की तरह भ्रष्टाचार को भी एक गंभीर अपराध माना जाना चाहिए अतीत में दी गई सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को सरकारें कितनी संजीदगी से लेती है। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि प्रशांत सोनवने को नासिक कुंभ प्रबंधन समिति के अधीन किसी पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

By nit

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