यूसुफ खान, ब्यूरो चीफ, धौलपुर (राजस्थान), NIT:

शब-ए-क़द्र की रात मुस्लिम समाज ने मस्जिदों में जागकर इबादत की। इस रात को जागने और इबादत करने की बड़ी अहमियत है क्योंकि किताबों में लिखा है कि शब ए कद्र की रात को एक पल ऐसा आता है जिसमें मांगी गई सभी दुआएं क़बूल होती हैं। इस अवसर पर तरावीह की विशेष नमाज अदा की गई और कुरान शरीफ की तिलावत की गई। मस्जिदों में जागकर इबादत करने वाले लोगों ने सुबह 5:30 बजे फज्र की नमाज अदा करने के बाद ही सोए। इस दौरान बाजार में भी चाय आदि की दुकानें देर रात तक खुली रहीं। शब ए कद्र पर कब्रिस्तानों में पहुंचकर फातिहा पढ़ने का सिलसिला चलता रहा इसलिए मुस्लिम समाज के लोगों ने रात में कब्रिस्तान पहुंचकर अपने परिजनों और दूसरे लोगों की मग़फिरत की दुआ की और फातिहा पढ़ी। लोगों के रात भर आने जाने के कारण कब्रिस्तान रातभर गुलज़ार रहे। इस अवसर पर तरावीह पढ़ाने वाले हाफिजों का सम्मान किया गया। घरों पर भी महिलाओं व बच्चों द्वारा पढ़े गए कुरान वख्शा गया। शहर की आधा सैकड़ा से अधिक मस्जिदों में तरावीह पूरी होने व शब ए क़द्र के अवसर पर जश्न का माहौल रहा।

