अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल/नई दिल्ली, NIT:
जंतर मंतर पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत सोमवार को आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असअद मदनी ने वक़्फ़ एक्ट में किए जा रहे संशोधन को देश के संविधान और उसके बुनियादी ढांचे पर एक गंभीर हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि यह उस रूपरेखा को विकृत करने का प्रयास है, जिसे हमारे संविधान निर्माताओं ने एक आधुनिक और लोकतांत्रिक भारत के लिए तैयार किया था। आज हमारे घरों, मस्जिदों और मदरसों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है और अब संविधान पर भी बुलडोज़र चलाने की कोशिश की जा रही है।

मौलाना मदनी ने कहा कि कुछ लोग इसे केवल मुसलमानों का मुद्दा बना रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि यह पूरे देश का मसला है। हमें इस साज़िश का हर हाल में विरोध करना है, क्योंकि यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की है जो संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखता है।
उन्होंने आगे कहा कि यह देश बहुसंख्यकों में अल्पसंख्यकों का है, और हमें सिर्फ अपने साथ ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति को जोड़ना होगा जो इस देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे में विश्वास रखता है। अगर हम सभी मिलकर, सभी चिंतित नागरिकों को साथ लेकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे, तो सफलता निश्चित होगी।
मौलाना मदनी ने इस मौके पर कहा कि हर बड़ी लड़ाई कुर्बानी मांगती है। अगर हम यह उम्मीद करें कि यह लड़ाई आराम से बैठे-बैठे जीत ली जाएगी, तो यह हमारी भूल होगी। हमें कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना होगा, अपनी आवाज़ को और मजबूत बनाना होगा और अपनी कतारों में एकता पैदा करनी होगी।
अंत में, उन्होंने एक शेर कहकर अपनी बात पूरी की:
थोड़ी तकलीफ-ए-रसन, फिर थोड़ी सी तकलीफ-ए-दार
उसके बाद ऐ दोस्तों, आराम ही आराम है।।

