जिला न्यायालय के सभागार में लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन (LSUC) दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ | New India Times

पवन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

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बालक को विधिक सहायता, सलाह एवं संरक्षण के साथ ही शासन की कल्याणकारी योजनाओं तक बालकों की पहुँच कराना नालसा (बालकों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं) योजना 2024 के अन्तर्गत बालकों के लिए गठित की गई जिला स्तरीय ईकाई का प्रमुख कार्य है। इस योजना के क्रियान्वयन में लीगल सर्विस यूनिट के सदस्यों को “बालक का सर्वोत्तम हित” हमेशा मस्तिष्क में रखना चाहिए, उक्त आशय के विचार प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री पी सी गुप्ता ने लीगल सर्विस यूनिट फॉर चिल्ड्रन के लिए आयोजित किये गये दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

साथ ही श्री गुप्ता ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य औपचारिक न होकर बालकों के संबंध में व्याप्त विधिक अंधकार के बीच प्रकाश पुंज के रूप में एक माध्यम खड़ा करना है जो बाल‌ अधिकारों को सुलभ कराने के लिए मार्ग आलोकित करेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश श्री पी सी गुप्ता ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर जिला न्यायाधीश श्री अशरफ अली, जिला जज एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री आशीष दवंडे, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री नितिन कुमार मुजाल्दा, नगर निगम मजिस्ट्रेट श्री धर्म कुमार, प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड श्रीमती रूपाली उइके, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री दीपक शर्मा, लीगल सर्विस यूनिट के सदस्य व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहे।

औपचारिक शुभारंभ के पश्चात बालकों के लिए गठित जिला विधिक सेवा ईकाई के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री आशीष दवंडे, जिला न्यायाधीश श्री तरूण सिंह, प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड श्रीमती रूपाली उइके व जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री दीपक शर्मा द्वारा प्रशिक्षण की आवश्यकता व उद्देश्य, नालसा (बालकों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं)योजना 2024 के मुख्य प्रावधान, बच्चों के संबंध में संवैधानिक प्रावधान, विधिक उपबंध, नीतिगत ढांचा, अंतर्राष्ट्रीय उपबंध, कानून से संघर्षरत बच्चों को पुलिस थानों, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, बाल न्यायालय, जेल आदि में विधिक सहायता, देखरेख एवं संरक्षण वाले बालकों को बाल संरक्षण संस्थान, पारिवारिक देखरेख, सीडब्ल्यूसी,में विधिक सहायता तथा अपराध के पीड़ित, गुमशुदा, बाल श्रमिक आदि के रूप में विधिक सहायता उपलब्ध कराने में लीगल सर्विस यूनिट की भूमिका के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।

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