सांसदों-विधायकों की पेंशन भी बंद हो, कर्मचारियों को मिले पुरानी पेंशन: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद | New India Times

शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT:

सांसदों-विधायकों की पेंशन भी बंद हो, कर्मचारियों को मिले पुरानी पेंशन: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद | New India Times

केंद्र सरकार द्वारा संसद में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः बहाल करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं होने की जानकारी दिए जाने पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर ने नाराजगी जताई है। परिषद ने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ सांसदों और विधायकों समेत सभी जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था की समीक्षा कर ‘एक राष्ट्र, एक पेंशन’ की नीति लागू करने की मांग की।
परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यदि सरकार पुरानी पेंशन योजना को वित्तीय भार मानती है तो सांसदों और विधायकों की पेंशन व्यवस्था पर भी समान रूप से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा, “माननीय को मिलेगी पेंशन चार, कर्मचारी लाचार” जैसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था में समानता के सिद्धांत पर सवाल खड़े करती है।
परिषद के महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि दोहरी पेंशन नीति से जनप्रतिनिधियों को सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से ‘एक राष्ट्र, एक पेंशन’ व्यवस्था लागू करने की मांग की।
शुक्ल ने कहा कि एनपीएस में कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान होने के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन निश्चित नहीं रहती। वहीं पुरानी पेंशन व्यवस्था में अंतिम वेतन के आधार पर सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) कर्मचारियों की पुरानी पेंशन से जुड़ी सभी मूलभूत चिंताओं का समाधान नहीं करती।
परिषद ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था की दिशा में लिए गए निर्णयों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से कर्मचारियों की मांग पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
परिषद ने केंद्र सरकार से पुरानी पेंशन तत्काल बहाल करने, NPS/UPS की विसंगतियां दूर करने, सांसदों-विधायकों समेत सभी जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था की समीक्षा करने और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। परिषद ने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी जारी रही तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन तेज़ किया जाएगा।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.