जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
भोपाल की समृद्ध विरासत और वर्तमान में इसकी उपेक्षा पर विरासत-ए-भोपाल मंच के सदस्य मोहसिन अली खान ने तीखे सवाल उठाए हैं। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने न केवल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, और यह विरासत अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।
विरासत की उपेक्षा पर सवाल
मोहसिन अली खान ने कहा कि भोपाल की 240 साल पुरानी बेगमों की हुकूमत ने एक समृद्ध विरासत छोड़ी, जिसे वे अपने साथ नहीं ले गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि जब वन और पर्यावरण की विरासत को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है, तो भोपाल की धरोहरों और विरासतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है। मोहसिन अली खान ने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को जल और जमीन की विरासत पर भी कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए।
ताजमहल और मिंटू हॉल का मुद्दा
भोपाल की ऐतिहासिक इमारतें, जैसे मिंटू हॉल,और शीश महल,ताजमहल भी मोहसिन अली खान के बयान के केंद्र में रहीं। उन्होंने इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन धरोहरों को संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

प्रधानमंत्री और निजीकरण पर निशाना
मोहसिन अली खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की धरोहरें, रेलवे स्टेशन, और एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक संपत्तियां अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को बेची जा रही हैं। उन्होंने कहा, “यह केवल भोपाल की विरासत की बात नहीं है, बल्कि पूरे देश की धरोहरें खत्म की जा रही हैं।”
इकबाल मैदान का मुद्दा
खान ने भोपाल के इकबाल मैदान का भी जिक्र किया और उम्मीद जताई कि स्थानीय विधायक इस मुद्दे को विधानसभा में जरूर उठाएंगे। उनका कहना है कि विरासत का संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
आवाज उठाने की अपील
मोहसिन अली खान ने समाज और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे भोपाल और देश की विरासतों के संरक्षण के लिए आगे आएं। उनका मानना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक धरोहर केवल इतिहास के पन्नों तक सिमटकर रह जाएगी।
मोहसिन अली खान का यह बयान न केवल भोपाल की विरासत पर ध्यान आकर्षित करता है, बल्कि यह सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर भी एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनकी अपील इस बात का प्रतीक है कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपत्तियों को संरक्षित करना अब समय की मांग है।

