नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

26 नवंबर हमारे भारत के संविधान को 75 साल पूरे हो गए। इसी के उपलक्ष्य में पूरे देश भर में प्रशासन और खास कर न्यायपालिका की ओर से संविधान सम्मान जनजागरण अभियान यात्राएं रैलियां कानूनी परामर्श शिविरों का आयोजन कराया गया। जामनेर तालुका विधि सेवा समिति एवं वकील संघ ने आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल मोतीलाल नेहरू की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय बाल दिवस और संविधान दिवस इस संयुक्त प्रोग्राम को जनता के बीच रखा।

जामनेर कोर्ट से नगर परिषद तिराहे तक स्कूली बच्चों के साथ रैली निकाली गई। न्यू इंग्लिश स्कूल में कानूनी परामर्श शिविर में वकीलों ने पेशे से हटकर दलीलों के बजाय कोचिंग की भूमिका अपनाई। अभियान में न्या डी एन चामले , सरकारी वकील एड कृतिका भट , सहायक सरकारी वकील एड अनिल सारस्वत , सुरेश महाजन , एड एस वी फासे , एड बी एम चौधरी , एड एम बी पाटील , एड डी वी राजपूत , सुरेश सुरवाडे सर समेत न्यायालय के कर्मचारी मौजूद रहे।

अमर रहेंगे धर्मनिरपेक्ष समाजवादी शब्द: संविधान दिवस के एक दिन पहले 25 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ” धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद संविधान की मूल विशेषताएं हैं ” संविधान की प्रस्तावना में बदलाव करने की कोई ज़रूरत नहीं है हमारी मानसिकता में मानवतावादी बदलाव होने चाहिए।
याचि ने शीर्ष अदालत से मांग कु थी 1976 में आपातकाल के दौरान 42 वे संविधान संशोधन से संविधान की प्रस्तावना मे शामिल किए गए धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी इन शब्दो को हटा दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणीयों के बाद अब धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी यह शब्द संविधान में अमर रहेंगे। 1936 में बाबा डॉ भीमराव आंबेडकर ने कहा था ” बंधुता लोकतंत्र का दूसरा नाम है। लोकतंत्र केवल सरकार के स्वरूप का नाम नहीं है। अपने साथी नागरिक को सम्मान और आदर के साथ देखने का नाम है लोकतंत्र”।

