नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मंत्री पद की दूसरी पारी में महाविकास आघाड़ी के निशाने पर आ चुके भाजपा नेता गिरीश महाजन के लिए इस बार मुंबई का रास्ता थोड़ा सा अवरोधों से भरा है। इसी अवसर को नतीजे में बदलने के लिए विपक्ष की ओर से जलगांव में महाजन को घेरने की कोशिशें तेज़ हो गई है। पूरे पांच साल 100% पार्टी विस्तार करने वाले महाजन चुनाव से तीन महीने पहले अपनी सीट के हर बूथ को मजबूत करते हैं। इसके विपरीत विरोधी दल मतदान के 15 दिन पहले अपने पक्ष में हवा बनाने का प्रयास करता है और अगर सरकार में रहा तो उसके पदाधिकारी मुजुमदारो के हमजोली बनकर गर्व महसूस करने में पांच साल गंवा देते हैं।जामनेर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने जनसंग्रह के लिए ताबड़तोड़ तरीके से सार्वजनिक समारोह के आयोजन शुरू कर दिए है। शिव-सृष्टि प्रॉजेक्ट का हिस्सा शिवाजी महाराज की मूर्ती के शोभायात्रा पर परिवर्तनवादियों (प्रचारकों) द्वारा उठाए गए सवाल कुछ हद तक प्रशासन को कठघरे में ला रहे थे लेकिन आम आदमी इस सारे पचड़े से कोसों दूर खड़ा था। शिव-शिल्प से संबंधित आरोपों की खबरों को देखने और पढ़ने वाले दर्शको की संख्या एक हजार का आंकड़ा तक छू नहीं सकी।

जामनेर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने जनसंग्रह के लिए ताबड़तोड़ तरीके से सार्वजनिक समारोह के आयोजन शुरू कर दिए है। शिव-सृष्टि प्रॉजेक्ट का हिस्सा शिवाजी महाराज की मूर्ती के शोभायात्रा पर परिवर्तनवादियों (प्रचारकों) द्वारा उठाए गए सवाल कुछ हद तक प्रशासन को कठघरे में ला रहे थे लेकिन आम आदमी इस सारे पचड़े से कोसों दूर खड़ा था। शिव-शिल्प से संबंधित आरोपों की खबरों को देखने और पढ़ने वाले दर्शको की संख्या एक हजार का आंकड़ा तक छू नहीं सकी।
आखिर ऐसी क्या ? बात है जो महाजन से इत्तेफ़ाक रखने वाले तत्व जनता के बीच विश्वास की भावना पैदा नही कर पा रहे है। राजनीति में एक मजे की बात यह है कि वर्तमान में जीने वाला कोई भी नेता अपने अतीत से डरता है और जनता बार बार उसे अतीत का आइना दिखाती है। भाजपा आचार संहिता लागू होने के पहले आधे अधूरे विकास काम जनता को बहाल कर एकतरफा माहौल तैयार करने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक परसो पांच अक्टूबर को शिव सृष्टि प्रकल्प के पहले चरण का लोकार्पण कर दिया जाएगा। राजनीतिक हालातों के बीच महाराष्ट्र मे जामनेर जैसी दर्जनों सीटे है जिनके नतीजों का आंकलन कर पाना कठिन है।
स्टैंड पर नहीं पीने का पानी: 14 करोड़ रुपए की लागत से बने जामनेर बस पोर्ट पर यात्रियों को पीने का पानी नसीब नही हो पा रहा है। खबर मे प्रकाशित प्याऊ निजी कंपनी की देन है जिसके नलके कई सालो से सूखे पड़े है। प्रजा गुजारिश कर रही है कि आचार संहिता लागू होने से पहले बस पोर्ट को नियमित पानी की आपूर्ति की जाए।

