रिमझिम रिमझिम बारिश के बीच अदा की गई ईद उल अज़हा की नमाज़ | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

रिमझिम रिमझिम बारिश के बीच अदा की गई ईद उल अज़हा की नमाज़ | New India Times

रिमझिम रिमझिम बारिश के बीच राजधानी भोपला के सभी प्रमुख मस्जिदों में ईद उल अज़हा की नमाज पढ़ी गई। सब से पहले सुबह 6:15 बजे न्यू कबाड़ खाना स्थित जामा मस्जिद अहले हदीस में मौलाना मोहम्मद मुदस्सिर सल्फी ने नमाज़ अदा कराई। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद मुदस्सिर सल्फी ने लोगों से ख़िताब करते हुये कहा कि आज ईदुल अज़हा यानी कुर्बानी का दिन है। यह एक महान दिन है जिसमें पूरी दुनिया के मुसलमान हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत पर अमल करते हुये लाखों जानवर अल्लाह का तकर्रुब हासिल करने के लिए कुर्बान करते हैं।

रिमझिम रिमझिम बारिश के बीच अदा की गई ईद उल अज़हा की नमाज़ | New India Times

मौलाना ने कहा कि जब इब्राहीम अलैहिस्सलाम 80 वर्ष के हुये तो उन्होंने  अल्लाह से प्रार्थना की, “या अल्लाह, मुझे नेक बच्चा देना, फिर अल्लाह ने उन्हें अच्छी खबर दी,भगवान ने उनके साथ अपने रिश्ते का पहला परीक्षा लिया और कहा, “अपने बेटे और उसकी मां को एक निर्जन रेगिस्तान घाटी में छोड़ दो, जहां नहीं कोई इंसान या फलदायी फल न उगता हो और न ही पीने के लिए पानी मौजूद हो। इब्राहीम ने अपने छोटे से परिवार को मक्का में छोड़कर चले आए। जहां अल्लाह ने इस छोटे परिवार पर अपनी रहमतों की बारिश की। जब इस्माइल युवावस्था की उम्र तक पहुंचे तो इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने सपने में देखा कि मैं अपने बेटे को अपने हाथों से ज़बह कर रहा हूँ। तो उन्होंने ने अपने बेटे के सामने इस ख़्वाब को बयान किया तो हज़रत इस्माईल ने कहा आप को जो कुछ भी आज्ञा दी गई है वह सब कर गुजरिये, आप मुझे उन लोगों में से पाओगे जो धीरज रखते हैं।”

फिर इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने बेटे को लेकर मिना की ओर गये और माथे के बल लिटा कर जबह करने ही वाले थे कि अल्लाह की ओर से एक आवाज़ आई कि ऐ इब्राहीम तुम ने तो अपना ख्वाब सच कर दिखाया, फिर अल्लाह की ओर से एक मेंढ़ा आया जिस को आप ने जबह किया।मौलाना ने कहा कि कुर्बानी का गोश्त खुद भी खाएं रिश्तेदारों को भी खिलाएं साथ ही साथ गरीबों को भी बाटें। अंत में उन्होंने ने कहा कि जिस तरह क़ुर्बानी के जानवर का गोश्त बेचने की अनुमति नहीं है, वैसे ही उसके चमड़े को बेच कर उसका पैसा अपने ऊपर इस्तेमाल करने की भी अनुमति नहीं है। क़ुर्बानी के कुल चार दिन हैं।
अंत में मौलाना ने तमाम मुसलमानों और मुल्क के लिए अमन व अमान की दुआ मांगी।

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