मज़दूर के हाथों रिबन नहीं काटा जा रहा है, बल्कि पत्रकारिता की परंपरा को तोड़ा जा रहा सत्ता नहीं, बल्कि 'गरीब मजदूर' मुख्य अतिथि... | New India Times

गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

मज़दूर के हाथों रिबन नहीं काटा जा रहा है, बल्कि पत्रकारिता की परंपरा को तोड़ा जा रहा सत्ता नहीं, बल्कि 'गरीब मजदूर' मुख्य अतिथि... | New India Times

जिला मुख्यालय अकबरपुर आर एस कंपलेक्स में डंके की चोट पर न्यूज़ चैनल ने अपने नए और आधुनिक न्यूज़ स्टूडियो के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहा है।

मज़दूर के हाथों रिबन नहीं काटा जा रहा है, बल्कि पत्रकारिता की परंपरा को तोड़ा जा रहा सत्ता नहीं, बल्कि 'गरीब मजदूर' मुख्य अतिथि... | New India Times

इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए हमने परंपरा से हटकर एक ऐसी पहल की है जो हमारे मूल्यों को दर्शाती है। इस स्टूडियो का उद्घाटन एक गरीब मजदूर के द्वारा किया गया आज भी इन्हें समाज प्रजा कहती है इनके बिना हर काम अधूरा है, ये परंपरा राजा महाराजाओं जमींदारों से चलती चली आई है  पत्रकारिता समाज का एक दर्पण है सरकार की बात जनता तक और जनता की बात सरकार तक पत्रकारिता गरीब मजदूर मजलूमों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए है।

मज़दूर के हाथों रिबन नहीं काटा जा रहा है, बल्कि पत्रकारिता की परंपरा को तोड़ा जा रहा सत्ता नहीं, बल्कि 'गरीब मजदूर' मुख्य अतिथि... | New India Times

हम चाहते है जहाँ ‘सत्ता’ नहीं, बल्कि ‘श्रम’ को मुख्य अतिथि का सम्मान दे पत्रकारिता की वर्षों पुरानी परंपरा को मैंने तोड़ दिया। आज ख़बर हम खुद बने हैं, लेकिन किसी अहंकार के कारण नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक बदलाव के कारण। पत्रकारिता का उद्देश्य सवाल ताकतवर से पूछने की होती है कमजोरो से नहीं लेकिन आज कमजोरों से सवाल पूछा जा रहा है।

मज़दूर के हाथों रिबन नहीं काटा जा रहा है, बल्कि पत्रकारिता की परंपरा को तोड़ा जा रहा सत्ता नहीं, बल्कि 'गरीब मजदूर' मुख्य अतिथि... | New India Times

अक्सर न्यूज़ स्टूडियो की चकाचौंध में लोग उन पसीने की बूंदों को भूल जाते हैं, जिन्होंने अपने खून पसीने से इस देश की नींव को सजा कर रखा है। हम कहते हैं कि हम ‘जनता की आवाज़’ हैं, तो हमने सोचा कि क्यों न इस आवाज़ के नए घर का आगाज़ भी उसी जनता के हाथों से हो, जो दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत कर देश का निर्माण करती है।

मज़दूर के हाथों रिबन नहीं काटा जा रहा है, बल्कि पत्रकारिता की परंपरा को तोड़ा जा रहा सत्ता नहीं, बल्कि 'गरीब मजदूर' मुख्य अतिथि... | New India Times

आज कोई मंत्री, कोई सुपरस्टार या कोई बड़ा उद्योगपति यहाँ मुख्य अतिथि नहीं है। आज हमारे ‘VIP’ वो हैं, जिनकी उंगलियों के निशान राष्ट्र निर्माण में है ये कैंची आज उन हाथों में है जो कल फिर कपड़ों के गठ्रृर को घाट के किनारे धुलते मिलेंगे मजदूर ओम प्रकाश कनौजिया ये सिर्फ़ एक रिबन नहीं कट रहे है, बल्कि पत्रकारिता की उस पुरानी परंपरा को तोड़ा  रहे है जहाँ सिर्फ़ ख़ास लोगों को जगह मिलती थी।

आज से इस स्टूडियो की गूँज समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचेगी, क्योंकि इसकी शुरुआत ही समाज के सबसे सच्चे व्यक्ति से हुई है। कुछ पत्रकारों ने सवाल श्री मजदूर से पूछा कि क्या आपने कभी सोचा था कि आपके जीवन में ऐसा भी मौका आएगा की एक दिन आप न्यूज स्टूडियो का उद्घाटन करेंगे?

श्री मजदूर ने कहा कभी हमने सपने में भी नहीं सोचा था हम तो एक गरीब आदमी है लोगों का कपड़ा धोकर अपने परिवारका गुजर बसर करते हैं हम चाह कर भी नहीं सोच सकते लेकिन मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया गया। जिससे हम जैसे गरीबों का जीवन धन्य हो गया, पत्रकार  गणेश मौर्य ने हमें इस लायक समझा समाज में गणेश मौर्य प्रेरणा के स्रोत है।

इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष चंद्र प्रकाश वर्मा डॉक्टर डॉक्टर जे.के वर्मा, साकेत मेडिकल सेंटर डा. एम.एम खान, डॉक्टर सालिक यादव, अमरदीप ज्वेलर्स, ललित मोहन श्रीवास्तव शिवकुमार सभासद, सैकड़ो की तादाद में लोग शामिल हुए।

By nit

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