400 पार के बाद भी आखिर क्यों सुनें पड़े हैं भाजपा के दफ़्तर? निकाय और विधानसभा की तैयारी में जुट गया विपक्ष | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

400 पार के बाद भी आखिर क्यों सुनें पड़े हैं भाजपा के दफ़्तर? निकाय और विधानसभा की तैयारी में जुट गया विपक्ष | New India Times

18 वीं लोकसभा में किसकी सरकार बनेगी इसका फैसला आने वाले कुछ घंटों के बाद हो जाएगा। आखरी चरण के वोटिंग के बाद टीवी स्क्रीन पर एग्जिट पोल के नाम पर जो फर्जी खेल खेला जा रहा है उसके खिलाफ़ युट्यूबर्स ने सोशल मीडिया पर मोर्चा संभाल रखा है। 400 या फिर उसके आसपास के फिगर को जनता के बीच सेट करने में भाजपा बिलकुल फेल साबित हुई है। पोल्स के अनुसार तिसरी बार बनती सरकार की खुशी को भाजपा दफ्तरों में छाए सन्नाटे ने मार दिया है। कहीं भी किसी भी भाजपा कार्यालय से जश्न की तैयारियों की खबरे तस्वीरें नहीं है। उत्तर महाराष्ट्र की सभी 8 सीटों पर भाजपा के जीत की भविष्यवाणी करने वाले स्टार प्रचारक गिरीश महाजन जीत के बाद होने वाले जश्न के आयोजन का ब्योरा देने के लिए कैमरे के सामने नहीं आए हैं। नासिक, डिंडोरी, अहमदनगर, शिर्डी, धूलिया, नंदूरबार, जलगांव, रावेर इन 8 में से 6 सीटों पर भाजपा लड़ रही है। पोल्स के मुताबिक महाराष्ट्र में MVA 32+ है इसमें उत्तर महाराष्ट्र की 5 सीटें शामिल है। दिल्ली में किस की सरकार बन रही है यह तो कल पता चलेगा लेकिन एक बात स्पष्ट है कि देश के लोकतंत्र और जनता को मज़बूत विपक्ष मिलने जा रहा है।

आगामी चुनाव में जुटा विपक्ष:- 10 जून को NCP (SP) का स्थापना दिवस है उससे पहले हि पार्टी आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रोग्राम पर चल पड़ी है। शिवसेना (UBT) भी उसी दिशा में बढ़ रही है, कांग्रेस फिलहाल लोकसभा नतीजों पर फ़ोकस के मूड में है। भाजपा ने संकेत दे दिए हैं कि केंद्रीय कमेटी में होने वाले परिवर्तनों के बाद महाराष्ट्र भाजपा में परिवर्तन की यह लहर चल पड़ेगी। देवेंद्र फडणवीस द्वारा महाराष्ट्र में की गई राजनीति को लेकर राज्य की जनता में काफ़ी असंतोष देखा गया है जिसमें कमी आने के बजाय दिन प्रति दिन इज़ाफा हो रहा है। ओबीसी चेहरे के बिना महाराष्ट्र विधानसभा का आम चुनाव लड़ना भाजपा के लिए खतरनाक होगा। केंद्र में कुछ भी हो उसका कोई प्रभाव अथवा दुष्प्रभाव राज्य की राजनीति और राजकाज पर नहीं होगा। विधानसभा चुनावों में सम्मानजनक सीटें पाने के लिए जातीय समीकरण को भाजपा कैसे डील करती है यह देखना दिलचस्प होगा।

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