राजधानी भोपाल में धार्मिक जनमोर्चा का किया गया गठन | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में धार्मिक जनमोर्चा के गठन के मौके पर ‘सद्भाव की स्थापना में धर्म गुरुओं की भूमिका’ के विषय पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें सभी धर्म के धर्म गुरु उपस्थित हुऐ। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सय्यद अली साहब ने धार्मिक जन मोर्चा के कार्यों एवं देशभर में मंच के द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं विभिन्न धर्मों का प्रतिनिधित्व कर रहे धर्मगुरुओं ने कहा कि समाज में प्रेम और भाईचारे की ज़रूरत है और इसके लिए सभी धर्मों के लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा। सभी धर्मगुरुओं ने सामाजिक धार्मिक एकता एवं साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

ब्रह्माकुमारी का प्रतिनिधित्व कर रही ब्रह्मकुमारी लीला बहन ने कहा कि अगर समाज के अंदर नफरत, घृणा होगी तो समाज कमज़ोर होगा, इसलिए हमें अपने समाज और मुल्क को कमज़ोर नहीं होने देना है। ईसाई मत के फादर आनंद मुतुंगल ने कहा कि धर्म प्रेम करना सिखाता है और यही असल तस्वीर है। धार्मिक होने का मतलब किसी से नफरत करना नहीं है जो ऐसा करे वह धार्मिक व्यक्ति नहीं है। भोपाल के श्री ज्ञानी गुरविंदर सिंह ने अपनी बात साझा करते हुए कहा कि जब तक मन में नियत अच्छी ना हो तब तक आप का भला नहीं हो सकता है। यदि आप किसी के साथ अच्छा करेंगे तो आप के साथ भी अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि, “आज समाज में बहुत सी बुराइयां फैली हुई हैं। इन बुराइयों को ख़त्म करने में धार्मिक गुरू की अहम भूमिका होती है। हम लोगों की ज़िम्मेदारी है कि समाज के प्रति जागरूक हों।

सर्वधर्म सद्भावना मंच के  संस्थापक पंडित नरेंद्र दीक्षित जी ने कहा कि मानव धर्म ही सर्वोपरि है। धर्म का राजनीती में इस्तेमाल बेहद गलत है। धर्म को राजनीती से अलग करने की ज़रुरत है। मानवता और भारत निर्माण के लिए हमें काम करने की ज़रूरत है और इसके लिए ऐसे मंच की आवश्यकता है।

बोध धर्म के भंते राहुल- धर्म का इस्तेमाल नफरत फ़ैलाने  नहीं होना चाहिए बल्कि सद्भाव के लिए होना चाहिए यही धर्म इस्तेमाल है। प्रो. इंजीनियर मोहम्मद सलीम ने कहा कि धर्म सभी इंसानों को जोड़ता है और धर्म समाज में एकता, शांति और सद्भाव के लिए प्रेरित करता है। कुछ राजनीतिक लोग धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल कर के धर्म को बदनाम करते हैं जिनसे बचने की ज़रूरत है।

अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा हमारा ये देश विविधताओं वाला देश है, हमारे देश में दुनिया के अधिकतर धर्म-पंथ पाए जाते हैं और इनके साथ हम सभी वर्षों से यहाँ साथ रहते हैं। हमारी विविधता हमारी कमज़ोरी नहीं है बल्कि शक्ति है। यहाँ जो हम सब साथ बैठे हैं यही भारत की असल तस्वीर है। जिस तरह अलग अलग विचार होने के बावजूद यहाँ एक साथ बैठे हैं वैसे ही हमारे समस्त देशवासियों को भी एक साथ मिलजुलकर रहने की ज़रुरत है। एक ग़लतफ़हमी आजकल बहुत आम हो गई है कि धर्म विवाद का कारण है जबकि ऐसा नहीं है बल्कि धर्म का दुरूपयोग असल विवाद की जड़ है।

सामाजिक भेद का असल कारण धर्म का अपने स्वार्थ के लिए दुरूपयोग है। धार्मिक ज़िम्मेदारों के बीच संवाद बेहद ज़रूरी है। यह मंच आपसी संवाद लिए है ताकि हम एक दुसरे का सहयोग करें। हम ऐसे काम करें जिससे समाज में आम सहमति है ऐसे कामों को हम एक साथ मिलजुलकर करें। ऐसा करके हम समाज में पॉजिटिव मैसेज दे सकते हैं। हमारे विचार अलग हो सकते हैं यदि कोई असहमत है तो उसको हम सभी स्वीकार करें लेकिन एक दुसरे के सम्मान में कोई कमी नहीं आना चाहिए। हम चाहते हैं धर्मगुरुओं का मंच मौजूद हो इसलिए हर राज्य में कोशिश की जा रही है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जमाअत इस्लामी हिन्द के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने की जो  जनमोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं।

श्री सय्यद अली ने धार्मिक जन मोर्चा की स्थापना का उद्देश्य भी विस्तार से बताया। कार्यक्रम में शामिल सभी धर्मगुरुओं को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। अंत में इस कार्यक्रम के आयोजक श्री सय्यद अली ने अल्लाह सर्वशक्तिमान और संगोष्ठी के प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया।

धार्मिक जनमोर्चा के इस कार्यक्रम में शामिल धर्मगुरुओं में आदिवासी समुदाय से भीम सिंह एवं संजय कुमार खैरवार, ईसाई मत से पास्टर सैमुअल बी फ्रांसिस, फादर ईश्वरदास एवं फादर अल्फ्रेड डिसूज़ा , समाजसेवी इंजीनियर अजय सिंह, गायत्री परिवार से रामचंद्र रैकवार,  समाजसेवी अशोक जुनेजा बोध मत से भंते राहुल जी एवं भीखूनी संघमित्रा, फादर आनंद मुतुंगल, सर्वधर्म सद्भावना मंच के संस्थापक नरेंद्र दीक्षित, गुरुद्वारा आनंदनगर से ज्ञानी गुरविंदर सिंह, गुफ़ा मंदिर के महंत पंडित डॉ आर पी त्रिपाठी, जमाअत इस्लामी हिन्द से डॉ. हामिद बेग, मोहम्मद इम्तियाज़ एवं डॉ. शाहिद अली, ब्रह्मकुमारी लीला बहन एवं ब्रह्मकुमारी राजकुमारी आदि मौजूद रहे।


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