मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

देश की राजनीति में आज कल आए दिन ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। राजनैतिक पिपासा की इच्छा में जिस प्रकार स्वस्थ और निष्पक्ष राजनीति दम तोड़ रही है वह चिंतनीय है। देश की सत्ताधारी पार्टी जिस प्रकार अपने पंजे तमाम प्रदेशों में गाड़ने के रास्ते अपना रही है वह रास्ते भारतीय राजनीति के एक नवीन आयाम को उजागर कर रही है। जिस प्रकार सत्ता हथियाने के लिए साम-दाम दण्ड भेद की नीति को चरितार्थ किया जा रहा है वह चिंतनीय है।
भारतीय राजनीतिक इतिहास में यह दौर सबसे घृणित दौर कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। जिस प्रकार विरोधी दलों की, या उनके गठबंधन की सरकारों को गिराकर अपनी सत्ता स्थापित करने का षड्यंत्र देश में दिखाई दे रहा है वह किसी कलंक से कम नहीं। अभी ताजा मामला बिहार का देखने में आया। जहां पानी पी पीकर भाजपा को कोसने वाले तथा पुन:भाजपा में नहीं जाने की कसम खाने वाले नीतीश बाबू ने अपनी चिरपरिचित शैली का प्रदर्शन करते हुए इंडिया गठबंधन की सरकार को गिराकर फिर भाजपा के सहयोग से सरकार स्थापित कर ली।
जिन नीतीश बाबू को गृह मंत्री अमित शाह भला बुरा कहते थे आज उनकी बलाएं लेते दिख रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि भारतीय वाशिंग मशीन पार्टी के एक चक्कर में तमाम आरोपों से मुक्त करने वाली पार्टी की नजर में अब नीतीश बाबू की छवि सुशासन की हो गई है। खैर पिछले दिनों एक और खेला भाजपा ने खेला जिसमें अभिमन्यु बने देश के कद्दावर कांग्रेस नेता कमलनाथ। 150दिवसीय इस कांड ने इंदिरा जी के दत्तक पुत्र कमलनाथ की छबि हीरो से जीरो बना डाली। एक कद्दावर नेता जिसने इंदिरा गांधी सरकार से लेकर मनमोहन सिंह सरकार तक हमेशा मलाईदार विभागों में मंत्री पद हासिल किया। कांग्रेस की नैया के सहारे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का ताज हासिल किया। कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर अपना ब्रांड बनाया, वही कमलनाथ जिनको इंदिरा जी अपना तीसरा पुत्र मानती थीं पिछले दिनों भारतीय वाशिंग पाउडर मशीन के लपेटे में आ गए।
सीधे तौर पर भाजपा में जाने की घोषणा नहीं करने वाले कमलनाथ पुत्र मोह मोदी जी की सेवा में पहुंच गए। मीडिया ने जम कर प्रचारित किया कि कमलनाथ का कांग्रेस से मोह भंग भाजपा में जायेंगे। यहां तक कि उनके खोटे सिक्के भी भड़भड़ाकर कांग्रेस के खिलाफ आवाज उठाने लगे। लगातार 15दिन के इस एपिसोड में पल-पल आ रही खबरों ने पूरी राजनीतिक बिसात में हलचल पैदा कर दी। पिछले दिनों जिस प्रकार मध्य प्रदेश में कांग्रेस के महापौर, सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भाजपा का दामन थामा वह सब कमलनाथ के इशारे पर चलता हुआ कांड था, मगर राजनीति के चाणक्य कमलनाथ भाजपा के हाथों गच्चा खा गए। भाजपा में जाने की खबरों का खंडन करने के बजाए बचाओ की मुद्रा में रहे कमलनाथ को भाजपा के नेताओं ने 15दिन में अर्श से फर्श पर ला खड़ा कर दिया। जहां एक और कांग्रेस नेता चिंतित थे तो दूसरी ओर भाजपा के कुछ नेताओं ने कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।सिंधिया को अपना तख्त ओ ताज खतरे में दिखा तो कई नेताओं को अपना भावी भविष्य।
यूथ आइकॉन राहुल गांधी की न्याय यात्रा के छिंदवाड़ा प्रवेश से पहले हुए इस घटनाक्रम में विधानसभा चुनाव हारे नेताओं ने जिस प्रकार कमलनाथ के कंधे पर चढ़कर कांग्रेस को कोसा अब वह बगलें झांक रहे हैं। 15 दिन चले इस हाई प्रोफाइल कांड का पटाक्षेप हो गया और एक पुरानी कहावत चरितार्थ हो गई। लौट कर बुद्धू घर को आए। कमलनाथ ने न कांग्रेस छोड़ी और न भाजपा ने उनको स्वीकारा। लेकिन इस कांड ने उनका भविष्य बर्बाद कर दिया। पुत्र मोह में अपनी पहचान खोने वाले कमलनाथ राष्ट्रीय नेता की करिश्माई व्यक्तित्व वाली छबि को खो गए। कांग्रेस जन के बीच 40/50वर्ष से बनी उनकी करिश्माई छबि अब धूमिल हो गई है।अब देखना यह है कि इस लोकसभा चुनावों में कांग्रेस कमलनाथ पर अब कितना विश्वास करेगी।
(लेखक डॉ सैय्यद खालिद कैस साहब भोपाल के जाने-माने समीक्षक, पत्रकार, अधिवक्ता, आलोचक हैं साथ ही पत्रकारों के हक़ अधिकार की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने वाली संस्था प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट के संस्थापक हैं।)
