अबरार अहमद खान, भोपाल, NIT;
राजधानी भोपाल में डायल 108 एंबुलेंस के लावारिस मरीज को अस्पताल ले जाने से मना करने और हमीदिया अस्पताल में लावारिस मरीजों को रात बाहर फेंकवाने का उस सनसनीखेज खुलासा हुआ जब दो दिनों से सड़क पड़ी एक बुजुर्ग महिला को 108 एंबुलेंस ने अस्पताल ले जाने से मना कर दिया।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के न्यू कबाड़ खाना स्थित सुप्रीम चादर वाले के सामने एक 64 वर्षीय बुजुर्ग महिला गम्भीर अवस्था में बेसुध पड़ी हुई थी लेकिन उसका सुध लेने वाला कोई नही था। संयोग से NIT सांवाददाता का उधर से जाना हुआ तो देखा कि एक बुजुर्ग महिला रास्ते में पड़ी हुई है। उस ने तुरंत इसकी सूचना 108 को दी तो वहां से जवाब मिला कि इसकी सूचना डायल 100 को दिया जाये। डायल 100 पर सूचना देने के कुछ ही देर में हेड कांस्टेबल केशव सिंह अपने हमराहीयों के साथ मौके पर पहुंच कर महिला के झोले की तलाशी ली तो उईसमे मौजूद आईडी के आधार पर महिला की पहिचान राम प्यारी 64 वर्ष पत्नी श्याम ग्राम ऐरन बामोरा जिला सागर के रूप में हुई। पुलिस द्बारा महिला के परिजनों को इसकी सूचना देकर उपचार के लिये हमीदिया हॉस्पिटल भेज दिया गया। लेकिन जब NIT सांवाददाता ने स्थानिय लोगों से बात की तो उनका कहना था कि यह महिला कल रात से ही पड़ी हुई थी, हम लोगों ने सुबह कई बार 108 को फोन किया तब जाकर वह मौके पर पहुंचे और यह कह कर वापस लौट गये कि यह महिला लावारिस है, हम इसको उपचार के लिये हॉस्पिटल नहीं लेजा सकते क्यों कि हमें डॉक्टरों द्वारा मना किया जाता है कि लावारिस मरीज को मत लाया करो। वहीं हमीदिया हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि जब किसी लावारिस मरीज को 108 द्वारा हॉस्पिटल लाया जाता है तो मरीज को एडमिट कर लिया जाता है लेकिन रात के समय उसे हॉस्पिटल से बाहर फेंकवा दिया जाता है।
