सरकार की तिज़ोरी में ठन-ठन गोपाल, प्रशासनिक मंजूरी के नाम पर मिलने वाले वोटों से नेता हो पाएंगे मालामाल, प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र सरकार से फंड की मांग कर रहे हैं सांसद | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सरकार की तिज़ोरी में ठन-ठन गोपाल, प्रशासनिक मंजूरी के नाम पर मिलने वाले वोटों से नेता हो पाएंगे मालामाल, प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र सरकार से फंड की मांग कर रहे हैं सांसद | New India Times

तापी निम्न प्रकल्प को 14 साल में पहली बार पांच हजार करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी मिलने की खबर का असली सच उसके तीसरे दिन सामने आया। वैसे “पहली बार” इस शब्द पर मोदी सरकार द्वारा शुरू से ज़ोर दिया गया है जिससे यह साबित हो की 60 साल में कुछ हुआ हि नहीं। भाजपा सांसद उन्मेश पाटील ने केंद्र सरकार से निम्न प्रकल्प के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। पाटील ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को ज्ञापन सौंपकर तापी निम्न प्रकल्प को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में शामिल करने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जलगांव और रावेर से अपनी पार्टी के वर्तमान सांसदों के टिकट काटने के मुड़ में है। जलगांव से गिरीश महाजन को लोकसभा का प्रत्याशी बनाया जा सकता है पर उनके रावेर से जीतने के चांस प्रबल है।

सरकार की तिज़ोरी में ठन-ठन गोपाल, प्रशासनिक मंजूरी के नाम पर मिलने वाले वोटों से नेता हो पाएंगे मालामाल, प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र सरकार से फंड की मांग कर रहे हैं सांसद | New India Times

लंबित प्रोजेक्ट्स के लिए सांसद केंद्र से पैसा मांग रहा है इसका मतलब बिलकुल साफ़ है की राज्य सरकार की तिजोरी में ठन ठन गोपाल है यानी फूटी कौड़ी नहीं है। उच्चतम न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार दी जा चुकी शिंदे – फडणवीस सरकार में शामिल गैर कानूनी मंत्रियों का राज्य कोष के संचित निधी से VIP श्रेणी तहत लालन पालन किया जा रहा है। नागपुर में संपन्न शीत सत्र के दौरान 60 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है। राज्य का राजस्व घाटा 60 हज़ार करोड़ रुपए है और राज्य पर ऋण का बोझ 3 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। वैश्विक मुद्रा कोष की ओर से ज़ारी ताज़ा आंकड़े के अनुसार भारत पर 205 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ हो गया है। भाजपा के शैडो मंत्रियों के निर्वाचनों में सैकड़ों करोड़ रूपयों के कामों की खबरे धार्मिकता के संग प्रचार किट का काम कर रही है। इस प्रोपेगेंडा में सहभागी चरणदास पत्रकारों को उनके सालों से पेंडिंग विज्ञापनों के बिल तक नहीं दिए जा रहे फिर भी वह अपने नेता की भक्ति शक्ति की अनुभूति में डूबकर समाज की दुर्गति का मज़ा ले रहे हैं। शिंदे सरकार ने विकास के जितने भी प्रोजेक्ट्स को नई प्रशासनिक मंजूरी (सुप्रमा) दी है उनमें से एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है। जामनेर की बात ले लीजिए यहां तापी-सुर नदी जोड़ प्लान, नार-पार योजना, भागपुर सिंचाई स्कीम, वाघुर लिफ्ट इरिगेशन, रबर बलुन के टी वेयर, कांग प्रोजेक्ट जल वितरण जैसे सिंचाई के प्रकल्प महाजन के पास जलसंपदा मंत्रालय होने के बाद भी पूरे नहीं हो पाए हैं। जामनेर की कृषि भूमि को शत प्रतिशत सिंचाई कराने की महाजन द्वारा दी जाने वाली गारंटी पर लोग अब खुलकर बोल रहे है।

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