शाहजहांपुर के तीन वीर सपूतों ने हंसते हंसते फाँसी का फंदा चूमा था: माहपौर | New India Times

मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:

19 दिसंबर 1927 यह वही दिन था जब शहर शाहजहांपुर के तीन वीर सपूतों ने हंसते हंसते फाँसी का फंदा चूमा था। इसी दिन अलग अलग जेलों में इन तीनों को फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया। तीनों क्रांतिकारियों अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफ़ाक़ उल्ला खाँ को अंग्रेज अफ़सरों से बचने के कई मौक़े मिले लेकिन उन्होंने देश की ख़ातिर फाँसी के फंदे पर झूल जाना उचित समझा।

बलिदान दिवस पर महानगर शाहजहांपुर के टाउनहॉल स्थित अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर महापौर अर्चना वर्मा, नगर आयुक्त सन्तोष कुमार शर्मा द्वारा माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

इस मौक़े पर महापौर ने कहा कि देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में इन तीन क्रांतिकारियों का अमूल्य योगदान रहा। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इसके अतिरिक्त नगर आयुक्त द्वारा उपस्थित जनों से कहा गया कि काकोरी ट्रेन एक्शन एक ऐसी घटना थी जिससे इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेज़ी हुकूमत की जड़ें हिला दी थी।

अंग्रेज़ी सरकार इनके इस कार्य से अंदर तक हिल गई थी। हमें आने वाले समय में प्रत्येक व्यक्ति को इनके व्यक्तित्व, संघर्ष की गाथा को सम्मुख रखना होगा जिससे आने वाली पीढ़ी गर्व का अनुभव कर सके।
इस मौक़े पर पार्षद (लालपुर) सिद्धार्थ शुक्ला, मुख्य सफ़ाई एवं खाद्य निरीक्षक हरिवंश दीक्षित, अशोक कुमार व अन्य कर्मचारियों मौजूद रहे।


Discover more from New India Times

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

By nit

This website uses cookies. By continuing to use this site, you accept our use of cookies. 

Discover more from New India Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading