इण्डिया गठबंधन की 19 दिसंबर को होने वाली बैठक में लोकसभा चुनाव का खींचा जाएगा खाका | New India Times

अशफ़ाक़ क़ायमख़ानी, जयपुर/नई दिल्ली, NIT:

इण्डिया गठबंधन की 19 दिसंबर को होने वाली बैठक में लोकसभा चुनाव का खींचा जाएगा खाका | New India Times

तीन हिन्दी पट्टी प्रदेश में भाजपा सरकार आने से भाजपा पार्टी उत्साहित होकर राम मंदिर के समारोह पूर्वक उद्घाटन करने के बाद समय से पहले लोकसभा चुनाव होने की सम्भावना जताई जाने लगी है। लोकसभा चुनाव में इण्डिया गठबंधन ठीक से भूमिका अदा करने के लिये 19 दिसंबर को दिल्ली में बैठक रखी है जिसमें एक खाका खींचा जा सकता है।
हिन्दी पट्टी में हार से कांग्रेस भी दवाब महसूस कर रही है। वह अब गठबंधन के घटकों से बराबर में समझौता करके आगामी लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारा आसानी से कर लेगी जिससे सभी दलों को अपने अपने प्रभाव क्षेत्र में सम्मान के साथ समझौता करने का अवसर मिल जायेगा।
अलग अलग प्रदेशों में अलग-अलग क्षेत्रीय दलों व कुछ जगह क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस एवं कुछ प्रदेशों में कांग्रेस का प्रभाव अधिक होने के चलते सीट बंटवारे में हर दल का अपना हक जायेगा जिसको देश व्यापी पार्टी कांग्रेस को मानना होगा। तभी 2024 के आम चुनाव में इण्डिया गठबंधन की सार्थकता रहेगी।
राजस्थान में मुख्यमंत्री व दो उपमुख्यमंत्री के साथ के साथ ही भाजपा व कांग्रेस के हारे हुये दिग्गज नेताओं सहित अन्य लोगों ने लोकसभा उम्मीदवारी के लिये भागदौड़ शुरु कर दी है। राममंदिर की शुरुआत के बाद जल्द लोकसभा चुनाव होने की घोषणा को सम्भावित मानकर नेता लोग उम्मीदवार बनने के समीकरणों पर नजर रख रहे हैं। भाजपा के हारे हुये दिग्गज नेताओं में राजेन्द्र राठौड़ की जयपुर ग्रामीण, सुभाष महरिया की सीकर, सतीश पुनिया की अजमेर, अरुण चतुर्वेदी की जयपुर से, ज्योति मिर्धा नागौर से उम्मीदवार बनने की चर्चा चल पड़ी है। कांग्रेस के हारे दिग्गज नेता भी लाइन में लगे हुये हैं जिनमें कर्नल सोनाराम बाडमेर से, दिव्या मदेरणा सीकर से एवं झूंझुनू से पूर्व जिला प्रमुख राजबाला ओला भी कोशिश कर सकते हैं। सीकर से चौमूं की भाजपा विधायक शिखा बराला परिवार भी भाजपा उम्मीदवार के लिए कोशिश कर सकता है। राजस्थान में सीकर या बीकानेर लोकसभा सीट पर इण्डिया गठबंधन का घटक माकपा भी दावा कर सकता है।
कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान कांग्रेस की बागडोर अब गहलोत की जगह सचिन पायलट के हाथों में आ सकती है। उसके बाद कांग्रेस राजनीति में बदलाव आयेगा। वहीं भाजपा उम्मीदवार तय करने में फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी-अमित शाह की एक तरफा चलेगी।

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