बोगस जन्म प्रमाण के आधार पर सरकार से एक साल अतिरिक्त वेतन लाभ लेने वाली मुख्याध्यापिका को कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सज़ा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

राजस्व विभाग को प्रस्तुत किए हलफनामे में झूठी जन्म तारीख दर्ज कर तहसीलदार द्वारा जन्म तारीख प्रमाणित करने के बाद उस दस्तावेज के सहारे एक साल तक सरकारी वेतन लाभ उठाने वाली प्रधान अध्यापिका को जामनेर न्यायालय ने तीन साल कैद की सज़ा सुनाई है। शितोले पंच मंडल कासोदा, तहसील एरंडोल, जिला जलगांव संचलित सार्वजनिक माध्यमिक विद्यालय में सेवारत मुख्याध्यापिका महानंदा भाऊराव पाटील आधिकारिक जन्म तारीख के मुताबिक 2015 में सेवा निवृत्त होने वाली थी। पाटील ने मुख्याध्यापिका पद के वेतन लाभ को एक साल बढ़ाने के लिए अपनी जन्म तारीख को एक साल कम कर दिया। जन्म तिथि में किए जाने वाले फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए पाटील ने जामनेर , जिला जलगांव के तहसीलदार के समक्ष एक हलफनामा दायर किया। इस हलफनामे में पाटील ने अपनी झूठी जन्म तारीख दर्ज की। मामले को लेकर शिक्षा संस्था ने जामनेर के तहसीलदार के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जिसकी सुनवाई के दौरान तत्कालीन तहसीलदार चंद्रकांत देवगुने ने महानंदा पाटील के खिलाफ जामनेर पुलिस स्टेशन में फौजदारी मामला कलमबद्ध किया।

इस मुकदमे में सरकारी अभियोक्ता एड कृतिका भट ने कुल सात गवाहो की गवाही को सत्यापित किया जिसमें नरेंद्र भीकनराव पाटील की गवाह को अहम माना गया। एड कृतिका भट ने कोर्ट को यह भरोसा दिलाया कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध यह आर्थिक रूप से सरकार को ठगने का गंभीर मामला है। न्यायाधीश डी एन चामले ने महानंदा भाऊराव पाटील को दोषी करार देते हुए तीन साल कैद की सज़ा सुनाई। सरकार पक्ष की ओर से एडवोकेट कृतिका भट के सहयोगी के रूप में एडवोकेट रविंद्रसिंह देवरे , एडवोकेट अनील सारस्वत ने कामकाज संभाला एडवोकेट प्रसन्न पाटील ने सहयोग किया।


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