सतपाल तंवर पर टूटा दुःखों का पहाड़, दूसरे नवजात बच्चे विश्वराज तंवर की भी हुई मौत, निशा तंवर की हालत अब खतरे से बाहर, अस्पताल में चल रहा है उनका इलाज | New India Times

फैज़ान खान, नई दिल्ली, NIT:

हमने किताबों में पढ़ा है कि भारतीय लोकतंत्र के जनक, संविधान निर्माता, भारत रत्न बाबा साहब डॉ० भीमराव अम्बेडकर ने अपनी संतानों की परवाह नहीं की जिससे इलाज और परिवार को समय ना देने के अभाव में उनकी 4 संतानों की अकाल मृत्यु हो गई। बाबा साहब के कुल 5 बच्चे थे यशवंत, गंगाधर, रमेश, इंदु (बेटी) और राजरत्न। यशवंत (1912 – 1977) के अलावा, अन्य चार की दो साल से कम उम्र में मृत्यु हो गई। यशवंत अकेले उनके वंशज के रूप में जीवित रहे। भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलते हुए सतपाल तंवर भी कुदरत की इस मार का शिकार हो गए। सतपाल तंवर और निशा तंवर के दो बच्चे युवराज तंवर और विश्वराज तंवर कुदरत को प्यारे हो गए। सतपाल तंवर के पहले एकमात्र बेटे कुंवर ओजस्वी तंवर ही उनके वंशज के रूप में 6 साल की उम्र को पार कर रहे हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। बाकी दो युवराज तंवर और विश्वराज तंवर की नवजात अवस्था में अकाल मृत्यु हो चुकी है।

बाबा साहब की तरह ही प्रकृति ने भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर के साथ किया है। उनके साथ बहुत बुरा हुआ है जिससे उबरने में काफी समय लगेगा। तंवर 1 अक्तूबर 2023 रविवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर संविधान बचाओ आंदोलन में संघर्ष कर रहे थे। उधर उनकी 9 महीने की गर्भवती पत्नी अस्पताल में संघर्ष कर रही थी लेकिन सतपाल तंवर ने अपनी पत्नी को अनदेखा करते हुए कहा कि मुझे अपने परिवार से अधिक बहुजन परिवार के करोड़ों लोगों की चिंता है मेरे ऊपर बाबा साहब जिम्मेदारी छोड़कर गए हैं मुझे उनको पूरा करना है। बस इसी पारिवारिक अनदेखी का खामियाजा सतपाल तंवर के परिवार को भुगतना पड़ा है। एक अक्टूबर से अगले दिन 2 अक्टूबर 2023 के दिन सतपाल तंवर की पत्नी निशा तंवर एडवोकेट ने नवजात बच्चे को जन्म दिया। जिसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस बच्चे का नाम सतपाल ने विश्वजीत तंवर रखा है।

निशा तंवर डायबिटीज की पेशेंट हैं। बच्चे में शुगर की मात्रा अधिक बढ़ जाना मौत का कारण माना जा रहा है। बच्चा गर्भाशय के एक तरफ चिपका हुआ पाया गया। जो निशा तंवर की मौत का बड़ा कारण भी बन सकता था लेकिन 5 प्रशिक्षित डाक्टरों और 10 से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में निशा तंवर एडवोकेट को बचा लिया गया। करीब 1 से 2 घंटे चले ऑपरेशन में निशा तंवर की हालत जानलेवा बनी हुई थी। अस्पताल ने एडवांस में ब्लड आदि का कड़ा इंतजाम किया हुआ था। बच्चा चिपका होने की वजह से बच्चेदानी को निकालने की नौबत आ रही थी। लेकिन बच्चेदानी को भी सुरक्षित रखा गया और ब्लड की भी नौबत नहीं आई। वह गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। दो दिन तक आईसीयू में रहने के बाद निशा तंवर अब खतरे से बाहर हैं। पिछले दिनों सतपाल तंवर ने अपने कई सोशल मीडिया हैंडल पर निशा तंवर को डायबिटीज के इन्सुलिन इंजेक्शन लगाते हुए पोस्ट की थी। उनका डायबिटीज का इलाज भी चल रहा था। यह जिम्मेदारी भी सतपाल तंवर के कंधों पर ही थी।

सतपाल तंवर ने अपनी पोस्ट में लिखा था मेरी जिंदगी मेरी पत्नी निशा तंवर एडवोकेट को रोजाना इन्सुलिन इंजेक्शन लगाते हैं। जो मुझे ही लगाने होते हैं। अब सोच रहा हूं अपनी जिंदगी अपनी पत्नी को समय दूं या समाज को समय दूं? तो मैंने फैसला किया है कि मैं समाज को समय दूंगा जो होगा देखा जाएगा। अपनी पत्नी की देखभाल की वजह से मैं समाज की करोड़ों माताओं बहनों को अकेला नहीं छोड़ सकता। बस यही वो शब्द हैं जो समाज के दिलों दिमाग पर गहरा असर डाल रहे हैं। सतपाल तंवर के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिससे वे गहरे सदमे में हैं, इस घटना के बाद से सतपाल तंवर की हालत भी ठीक नहीं है। निशा तंवर का एक्सपर्ट डॉक्टरों की देखरेख में इलाज चल रहा है। वास्तव में भीम मिशन पर चलते हुए सतपाल तंवर का बहुत बड़ा बलिदान है। बाबा साहब डॉ० भीमराव अम्बेडकर के बाद नवाब सतपाल तंवर ने अपने दो बच्चों को भीम मिशन पर कुर्बान कर दिया है। जिसे इतिहास में कभी भुलाया नहीं जा सकता।


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