बैक डोर सीटों पर सरकार की नज़र : निर्विरोध के विरोध में विपक्ष ? | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बैक डोर सीटों पर सरकार की नज़र : निर्विरोध के विरोध में विपक्ष ? | New India Times

महाराष्ट्र विधान परिषद की ठाणे , पुणे , सातारा – सांगली , रायगढ़ – रत्नागिरी – सिंधुदुर्ग , नागपुर , भंडारा – गोंदिया , चंद्रपुर – गढ़चिरौली – वर्धा , छत्रपति संभाजी नगर(औरंगाबाद) – जालना , परभणी – हिंगोली , धाराशिव (उस्मानाबाद) – लातूर – बीड , नांदेड़ , नासिक , जलगांव , अहिल्यानगर इन 17 सीटों के लिए 18 जून को वोटिंग होगा। आंकड़ों के मुताबिक सभी सीटों पर बीजेपी गठबंधन का दबदबा है। सेना NCP में टूट के कारण महाविकास आघाड़ी के नंबर्स बंट चुके हैं। आपसी गुटबाजी और कांग्रेस के भीतर बीजेपी के छद्म स्लीपर सेल से त्रस्त कांग्रेस के अकार्यक्षम नेता गण अकेले राहुल गांधी के संघर्ष के भरोसे पर चमत्कार के इंतजार में है।

बैक डोर सीटों पर सरकार की नज़र : निर्विरोध के विरोध में विपक्ष ? | New India Times

जलगांव में बीजेपी ने नंदकिशोर महाजन को उस मैदान में उतारा है जो एकनाथ शिंदे की शिवसेना के डटने और पीछे हटने की स्क्रिप्ट के पहले से जीत के लिए सजाया जा चुका है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजीत पवार की NCP के बिना महाराष्ट्र में बीजेपी विधायिका का कोई चुनाव नहीं जीत सकती है। महाराष्ट्र बीजेपी के सबसे सीनियर नेता गिरीश महाजन ने विधान परिषद चुनाव के पहले क्रेडिट तथा मेरिट को लेकर मीडिया ट्रायल शुरू कर दिया है।

राज्य सभा और विधान परिषद में चुनकर जाने वाले विपक्ष के नेताओं को जनता के बीच जनाधार नहीं होने की फब्तियां कसने वाले गिरीश महाजन अपनी पार्टी के प्रत्याशी को बैक डोर एंट्री करवाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। राज्य में महाविकास आघाड़ी निर्विरोध निर्वाचन के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रही है। जलगांव के इतिहास में 2010-11 में मनीष ईश्वरलाल जैन की ओर से जीता गया विधान परिषद का चुनाव सबसे यादगार माना जाता है। 4 जून को नामांकन वापिस लेने की अंतिम तारीख है , यह देखना रोचक होगा कि किस सीट पर कौन टिकता है और कौन बिखरता है।

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अनशन :

जामनेर ब्लॉक की वाकी बुद्रुक ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार की जांच की मांग मनवाने के लिए अमोल सुरवाडे ने 30 मई से आमरण अनशन शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र की ग्राम पंचायतों में काम कर रहे नेता और ग्राम सेवक अपने खून पसीने से कमाए करोड़ों रुपए के आलीशान बंगलों के मालिक हैं।

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