नरेंद्र कुमार, जलगांव/रायगढ़/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के खानापुर ब्लॉक में पहाड़ों की तलहटी में बसे इरशालवाड़ी गांव के करीब पचास घर भूस्खलन के कारण जमींदोज हो गए हैं। इस घटना में 100 लोग गायब हैं। शिंदे-फडणवीस-अजीत पवार सरकार का सारा का सारा मंत्रीमंडल बारी बारी से घटना-स्थल पर आवागमन कर रहा है। इस घटना पर गृहमंत्री अमित शाह ने दुःख जताते हुए राहत और बचाव कार्य को लेकर राज्य सरकार से बात की है। विपक्ष के कई नेताओं ने घटना-स्थल का मुआयना किया जिसके बाद राज्य विधानसभा के मानसुन सत्र में विपक्षी मविआ ने इस घटना को लेकर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोंकण में 1988 से अब तक 300 से अधिक लोगों को प्राकृतिक आपदा में अपनी जान गंवानी पड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसरो ने केंद्र सरकार को हैवी रैन के बारे में चेतावनी दे दी थी जिसके इनपुट राज्य सरकार के पास हैं बावजूद इसके राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर कोई योजना नहीं बनाई और जैसे ही यह घटना घटी वैसे तड़के मंत्रियों को वहां दौड़ा दिया। अगस्त 2019 को याद कीजिए जब CM देवेंद्र फडणवीस जलगांव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मांगते रहे और उधर आलमट्टी डैम बैक वाटर के कारण पश्चिम महाराष्ट्र के तीनों जिले बाढ़ की चपेट में आ गए तब सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन को कोल्हापुर में व्यक्तिगत रूप से राहत और बचाव कार्य में उतरना पड़ा। तब और अब सरकार के मिस मैनेजमेंट का पैटर्न और राजनीतिक किरदार सेम है बस घटनाएं अलग अलग हैं। आखिर भाजपा की सरकार में ऐसी घटनाएं क्यों हो रही है और इन घटनाओं से होने वाली क्षति को टालने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?

आपदा में इमेज मैनेजमेंट
आपदाओं मे अवसर खोजने वाले नेताओं की इमेज को चमकाने का न्यूज़ फैक्टर स्मार्ट फोन के कारण काफी आधुनिक हो गया है। राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने संगठनों में आइटी सेल बना दिए हैं जिनके वर्कर अपने नेता को मानवता के मसीहा के रूप में इस तरह पेश करते हैं कि मानो नेताजी ना होते तो पीड़ितों का क्या होता। इसे इमेज मैनेजमेंट (छवि को चमकाना) कहते हैं जिसका असर समाज के उस तबके पर होता है जो मतदाता के रूप में भावनिक होता है। ज्ञात हो कि इमेज मैनेजमेंट के कैमरा प्रिय नेता और उनकी सर्वोच्च लीडरशिप मणिपुर हिंसा पर उनके सरकार की जवाबदेही और फोटोशूट इन दोनों से बचते नजर आए हैं।
