नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बॉम्बे प्रेसीडेंसी इलाके मे उच्च जाति का हित सोचने वाले अखबार थे इस लिए डॉ बाबा भीमराव आंबेडकर ने मूकनायक शुरू किया। छत्रपति शाहूजी महाराज ने मूकनायक को ढाई हजार रुपए की सहायता की। बहिष्कृत भारत के बाद शुरू किया गया जनता आगे प्रबुद्ध भारत बना। लेफ्टिस्ट स्वतंत्र मजदूर पार्टी की तमाम राजकीय सोच जनता में व्यक्त होती।

इसी पार्टी के कार्यकर्ता दौलतराव जाधव 1937- 38 में महाराष्ट्र के पूर्व पश्चिम खानदेश इलाके में आदिवासी और दलितों को जमीन के अधिकार मिले इस मांग को लेकर आंदोलनरत थे। जनता मे छप रही आंदोलनो की रिपोर्टिंग को ताकत देने के लिए आदिवासी महिलाओ ने जनता को एक एक आना चंदा दिया। बहिष्कृत भारत में डॉ बाबा भीमराव आंबेडकर लिखते है केसरी में मूकनायक का इश्तियार छापने का अनुरोध केसरी ने ठुकरा दिया। डॉ बाबा साहब स्वराज्य बनाम सुराज्य के पक्षधर थे। 1924 मे बनी सर्व जातिय बहिष्कृत हितकारिणी सभा के पैनल में डॉ बाबासाहब आंबेडकर प्रमुख नेता है।

पैनल ने समाज समता संघ स्थापन कर समता नाम का अखबार शुरू किया। समता में डॉ बाबासाहब ने ब्राह्मण और अन्य समाज के बीच के विवाद की गहन चिकित्सा की। बहिष्कृत भारत में “दुःख में सुख” इस शीर्षक से लिखे कॉलम में डॉ बाबासाहब आंबेडकर लिखते है जन्म से जो उच्च नीच का विचार मानता है वो ब्राह्मण्यग्रस्त है फिर ऐसा मानने वाला व्यक्ति कोई भी हो। इसी भूमिका के कारण अन्य जाति के लोग डॉ बाबासाहब आंबेडकर से जुड़े। महाड के चवदार तालाब जलसत्याग्रह आंदोलन के दौरान डॉ बाबासाहब आंबेडकर के उपस्थिति मे गंगाधर सहस्त्रबुद्धे ने मनुस्मृति पढ़कर उसे सार्वजनिक रूप से जलाया।
डॉ बाबासाहब आंबेडकर पर महात्मा ज्योतिबा फुले जी के सत्यशोधक विचारों का प्रभाव था। पुणे के अख़बार यानी तब का गोदी मीडिया सामाजिक आंदोलनो को लेकर प्रोपेगेंडा खबरे छापता जिसके जवाब में डॉ बाबासाहब आंबेडकर ने बहिष्कृत भारत और जनता मे वो सच लिखा जो शोषित समाज को लड़ने की प्रेरणा देता रहा। डॉ बाबा भीमराव आंबेडकर जी का 135 वां जन्म दिवस लोकतांत्रिक समाजवादी भारत के निर्माण की चेतना को प्रखरता से उभार रहा है।

