अमानगंज में पत्रकार पर जानलेवा हमला, ₹45,000 की लूट — पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल | New India Times

संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

अमानगंज में पत्रकार पर जानलेवा हमला, ₹45,000 की लूट — पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल | New India Times

अमानगंज थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर प्राणघातक हमला कर ₹45,000 की नकदी लूटने का मामला सामने आया है। इस घटना से जिले के पत्रकारों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने पुलिस प्रशासन की कथित उदासीनता पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।

अमानगंज में पत्रकार पर जानलेवा हमला, ₹45,000 की लूट — पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल | New India Times

घटना का विवरण:                                                  पत्रकार कल्याण परिषद द्वारा पुलिस अधीक्षक को 27 अक्टूबर 2025 को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, यह वारदात 22 अक्टूबर 2025 की सुबह लगभग 8:30 बजे की है। पत्रकार श्री सत्यम अमानगंज के मंगल बाजार के पास से गुजर रहे थे, तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी गाड़ी को रोक लिया।

आरोप है कि इन अज्ञात बदमाशों ने सत्यम पर प्राणघातक हमला किया और कट्टा अड़ाकर ₹45,000 नकद लूट लिए। जब सत्यम ने विरोध किया तो बदमाशों ने उन्हें बेरहमी से पीटा। घटना की सूचना देने के बावजूद अमानगंज पुलिस ने लूट और जानलेवा हमले की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ सामान्य मारपीट का मामला दर्ज किया।

पत्रकार कल्याण परिषद का विरोध:
पत्रकार कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वेदांती त्रिपाठी और पदाधिकारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। परिषद ने कहा कि पत्रकार समाज के हित में काम करते हैं, और यदि उन्हें ही आपराधिक तत्व निशाना बनाएंगे तो समाज में भय का माहौल पैदा होगा।

परिषद ने पुलिस अधीक्षक से निम्न मांगें की हैं:
आरोपियों के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) और लूट के तहत मामला दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
पत्रकार और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
समाज में भय फैलाने वाले ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी और वैधानिक कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि इतने गंभीर अपराध को केवल सामान्य मारपीट की धाराओं में दर्ज किया गया तो यह न्याय का अपमान होगा। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर मध्य प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय पत्रकार समुदाय पुलिस की ओर से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा है।

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