नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने 9 लाख 34 हजार करोड़ रुपए के कर्ज़ तले राज्य को गिरवी रख दिया है। PWD से टेंडर लेने वाले ठेकेदारों को सरकार से एक लाख करोड़ रुपया लेना है। ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए नाबार्ड को भारत सरकार की गारंटी पर विश्व बैंक की ओर से सीधा ऋण मिलता है। बड़े-बड़े ठेकेदार नाबार्ड से संचालित मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के टेंडर लेकर घटिया काम कर के नोट छाप रहे हैं। जामनेर ब्लॉक में चालीसगांव पाचोरा के ठेकेदार मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के निर्माणों की गुणवत्ता को अपने जूते की नोक पर रखते नज़र आ रहे हैं। साढ़े तीन मीटर चौड़ी सड़क बनानी है तो नाप लो फिर गिट्टी डालो फिर रोलर करो उसपर मुरूम फिर रोलर उसपर गिट्टी डामर स्प्रे अंत में रोलर से दबाकर काम को दिनदहाड़े रफादफा रफादफा कर दो।
इन ठेकेदारों ने जहां जहां कच्चे माल के लिए डामर गिट्टी के प्लांट लगवाए गए हैं वहां प्रदूषण नियंत्रण मंडल के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। ग्राम पंचायतों के बाबू से लेकर राजस्व विभाग के बड़के साहब को नज़राना पेश कर सब कुछ सेटल कर दिया जाता है। इसलिए आज तक एक भी प्रोसेसिंग प्लांट पर किसी भी सरकारी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। कमीशन के खेल में नेताओं के आर्थिक साझेदार पार्टी प्रेम के नौटंकी से वफादार माने जाते कुछ ठेकेदार जलगांव जिला नाबार्ड के बेताज बादशाह बने बैठे हैं।
जामनेर मोयगांव सड़क पर 2 करोड़ 94 लाख रुपए से मंजूर पुल के टेंडर में सीधा 94 लाख रुपए का गबन है। ग्रामविकास विभाग में चल रहे इस भ्रष्टाचार के माध्यम से विश्व बैंक से उठाए गए हजारों करोड़ रुपए के कर्ज़े को चूना लगाया जा रहा है। अगली रिपोर्ट में हम आपको मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना + नाबार्ड के कमीशन सिस्टम के बारे में जानकारी देने का प्रयास करेंगे।
