मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

आल इंडिया हज वेलफेयर सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकीत खान खंडवा ने बताया कि हज के लिए बनी नई पॉलिसी में केंद्रीय हज कमेटी की ओर से सऊदी रियाल दिए जाने की रिवायत दोबारा से शुरू किये जाने का कोई ज़िक्र नहीं है। गुज़िश्ता दो सालों की तरह इस साल भी हज पर जाने वालों को विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज ) का इंतेज़ाम खुद ही करना होगा। हज-2024 में गए हिंदुस्तान के हाजियों को भारतीय स्टेट बैंक की ओर से मुहैय्या कराए गए सऊदी रियाल से काफ़ी आसानी हुई थी।
एसबीआई ने धर्मार्थ सेवा हेतु वाजिब दाम पर रियाल दिए जाने का बेहतरीन नज़्म (व्यवस्था) बनाया गया। इस साल भी जिन दरखवास्त गुज़ारों का इंतेखाब हज के लिए हो जाए वो सऊदी रियाल लेने में जल्दबाज़ी कर दलालों के चक़्कर में न फंस जाए इसका ध्यान रखा जाए। पिछले साल नाम आते ही लोग रियाल के चक़्कर में लग गए और महँगी कीमतों पर रियाल लेकर ठगा गए। रियाल की फ़िक्र न करते हुए नाम आ जाने के बाद हज के तमाम ही छोटे बड़े अरकान को सीखने की तैयारी करना चाहिए। किसी और की बातों में आकर रियाल की जुगाड़-तुगाड़ करने में नुकसान ही उठाना पड़ता है।
स्टेट बैंक एक हाजी को जितने रियाल देती है अगर वो और ज़्यादा लेना चाहे तो हज पर जाने से पहले हज कमेटी में लगे काउंटर से या फिर बॉम्बे मार्केन्टाइल को आप बैंक से भी मुनासिब दामों पर रियाल मिल जाते हैं। पिछले अनुभव के आलोक में ये कहा जा सकता है कि हज की रवानगी शुरू होने से पहले सऊदी करंसी को लेकर बड़ा गेम खेला जाता है। अपने आपको खिदमतगार बताने वाले कुछ लोग रियाल की आड़ में कमाई करते हैं।हाजी भरोसे में रहते हैं कि इनकी वजह से सस्ते रेट में रियाल मिल जायेंगे लेकिन होता उल्टा है। मार्केट रेट से महँगा ये खिदमतगार (?) अपने हाजियों को लाकर देते हैं। हज कमेटी ने रियाल देने का सिस्टम क्या खत्म किया कालाबाज़ारी चालू हो गई है??
बहरहाल हज के मैदान में बेलौस काम कर रहे ख़ादिमुल हुज्जाज हाजियों को रियाल लेने में जल्दबाजी ना करने व इत्मीनान के साथ हज की तैयारी व हज के अरकानों को सीखने में अपना वक़्त सर्फ करने की सलाह दें।

