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राजस्थान में मुस्लिम मयारी इदारों के फुकदान के कारण अन्य स्कूलों में प्रवेश के लिए मशक्कत कर रहे हैं मुस्लिम छात्र

अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT; ​राजस्थान के गावं-ढाणी से लेकर शहर-महानगरों तक में मुस्लिम समुदाय द्वारा सामाजिक या फिर निजी…

“अच्छे दिनों (?)” के चार साल, पर आम आदमी के मुस्कुराने के पल कितने? मंहगाई, मंदी और किसानों की आत्महत्याओं पर यह जश्न क्यों?

Edited by Arshad Aabdi, NIT; ​ लेखक: सैय्यद शहंशाह हैदर आब्दी चार साल काफी होते हैं किसी सरकार के कार्यकाल…

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर विशेष:यह खामोश मिजाज़ी तुम्हें जीने नहीं देगी, दुनिया में जो जीना है तो कोहराम मचा दो। खामोशी तोड़ो,  आगे आओ ! मई दिवस की अलख जगाओ!! छिन गये अधिकारों को  फिर से लड़कर लेना होगा! हर ज़ोर-ज़ुल्म का ज़ोरदार जवाब हमको देना होगा!!

Edited by Arshad Aabdi, NIT; लेखक: सैय्यद शहंशाह हैदर आब्दी ​हे ईश्वर! मुझे काम दीजिये जब तक की मेरी ज़िन्दगी…

नारी सुरक्षा पर विशेष: कलयुग के रावणों और सीता हरण करने वाले रावण में फर्क, जब सीता हरण करने वाले रावण का वध हो सकता है तो कलयुग के रावणों को सरेआम फांसी क्यों नहीं???

वी.के.त्रिवेदी, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT; ​एक समय वह था जब राक्षसराज रावण के चगुंल से अपहृत सीता जी को छुड़ाने…

“हम दूसरों के पाप और अपराध गिनाकर, अपने पाप और अपराध को सही नहीं ठहरा सकते”: शहंशाह हैदर आब्दी; बलात्कार व हत्या की घटनाओं को संप्रदायिकता का रंग देने का बढता मिजाज

लेखक: सैय्यद शहंशाह हैदर आब्दी Edited by Arshad Aabdi, झांसी, NIT​ हम आसिफा के लिए इंसाफ नहीं मागेंगे? हमने निर्भया…