नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आपके खेतों में जो मिट्टी है सबसे पहले उसका परीक्षण करवाएं, उसके भीतर कौनसे एलिमेंट्स (प्राकृतिक तत्व) का प्रमाण कितना है उसको देखें और उसके आधार पर अपनी फसलों को खाद दें, ऐसा आह्वान ब्लाक कृषी अधिकारी अभिमन्यु चोपड़े ने किसानों को किया है। जलगांव के नेरी में इंडिकेम स्पेशलिटी फर्टिलाइजर पुणे और क्रांति एग्रो की ओर से आयोजित परिसंवाद में वह बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में किसानों को केला, कपास, हरी सब्जियों के खाद्य प्रबंधन को लेकर मार्गदर्शन किया गया। मंच पर दिलीप खोड़पे, रितेश पाटील, प्रशांत पाटिल, राजू पाटिल, प्रताप पाटिल, अनिल खोड़पे, सुरेश खोड़पे, जितेंद्र खोड़पे, किशोर खोड़पे, गोविंदा पवार समेत अन्य मान्यवर मौजूद रहे। उक्त परिसंवाद में किसानों को पर्यावरणीय परिवर्तन और बारिश की उपलब्धता के आधार पर फसलों के चयन करने को लेकर तंत्रशुद्ध जानकारी दी गई। विदित हो कि मौजूदा ख़रीफ सत्र 2023-24 में किसानों का रूझान कपास की बुआई पर अधिक है बावजूद इसके की बीते साल की कपास को 8 महीने घर में संभाल कर रखने के बाद भी महज 6500 का दाम मिला। केंद्र सरकार के गलत आयात निर्यात निति के कारण कपास का मार्केट पिट गया है और किसानों को लाखों, करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है, ऋण का बोझ बरकरार है और ऐसे में शिंदे-फडणवीस सरकार के कैमरा प्रिय मंत्री दाम बढ़ोतरी का झांसा देकर किसानों का मज़ाक उड़ा रहे हैं।
