मध्य प्रदेश के स्टेट हाइवे पर फास्टैग अनिवार्य, फास्टैग ना होने पर लगेगा दोगुना टोल | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के स्टेट हाइवे पर फास्टैग अनिवार्य, फास्टैग ना होने पर लगेगा दोगुना टोल | New India Times

मध्य प्रदेश के स्टेट हाइवे पर भी अब नेशनल हाइवे जैसा नियम लागू होगा। इसके तहत यदि आपके वाहन में फास्टैग नहीं है और कैश पेमेंट कर रहे हैं तो आपको दोगुना टोल चुकाना पड़ेगा।

दरअसल, मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन अब इंडियन हाइवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) की गाइड लाइन फॉलो करेगा।

अभी राज्य के टोल प्लाजा में फास्टैग के अलावा एक कैश लेन होती है। जिन वाहनों में फास्टैग नहीं हैं, वे यहां कैश पेमेंट कर सकते हैं।

फास्टैग और कैश, दोनों के लिए अभी एक ही राशि है लेकिन सितंबर के बाद फास्टैग न होने पर डबल चार्ज लगेगा। यानी, 50 रुपए वाले टोल प्लाजा पर कैश देते हैं तो आपको 100 रुपए देना होंगे।

नेशनल हाइवे में लगता है डबल चार्ज

नेशनल हाइवे के टोल प्लाजा में फास्टैग न होने की दशा में वाहन चालक को दोगुना चार्ज देना पड़ता है। ऐसी ही व्यवस्था राज्य के टोल प्लाजा पर भी लागू होगी। फास्टैग की व्यवस्था इसलिए शुरू की गई थी ताकि टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार न लगें। यात्री अपने गंतव्य तक जल्द पहुंचें।

केवायसी की जानकारी भी

गौरतलब है की फास्टैग के लिए अब केवायसी अपडेट भी हो रहा है। इससे संबंधित व्यक्ति की पूरी जानकारी भी उपलब्ध रहती है। अधिकारियों के मुताबिक फास्टैग से वाहनों की ट्रेसिंग और उनके आने-जाने का रिकार्ड भी उपलब्ध रहता है।
देश में नेशनल हाईवे पर फास्टैग फरवरी 2021 से अनिवार्य किया गया था।

वर्तमान में नेशनल इलेक्ट्रानिक टोल कलेक्शन प्रोग्राम 1200 से ज्यादा टोल प्लाजा पर लागू है। इनमें 95 लाख ट्रांसजेक्शन रोजाना होते हैं जिनसे 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन रोजाना होता है।

स्टेट हाईवे पर हैं 118 टोल

एमपीआरडीसी के अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश में 118 टोल प्लाजा हैं। इनसे सालाना 500 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन होता है। इसके तहत आईएचएमसीएल की गाइडलाइन के तहत आरडीसी और टोल प्लाजा संचालक के बीच हुए एग्रीमेंट में भी इसे लागू किया जाएगा इन टोल प्लाजा से रोजाना 20 से हजार से ज्यादा वाहनों की आवाजाही होती है।

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