नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

30 अप्रैल 2023 को जलगांव जिले में अचानक से आए चक्रवाती तूफान के कारण प्रकृति की करोड़ों रूपये की अचल वन संपदा धराशायी हो गई। हजारों पेड़ उखड़कर जमीन पर गिर गए जिसमें सैकड़ों पेड़ काफी पुराने थे। पेड़ों के उखड़ने से सबसे अधिक नुकसान बिजली बोर्ड का हुआ। बिजली के पोल टूट गए, वायर कट गई, ट्रांसफार्मर जल गए, चार दिन तक बत्ती गुल रही। दौरान तूफ़ान से उखड़े पेड़ों का मलबा हटाने के लिए प्रशासन ने युद्धस्तर पर दिनरात काम किया। पेड़ों का टिम्बर माकूल रूप से इमारती और जलाने योग्य था जिसकी मार्केट में कीमत करोड़ों में आंकी जा सकती है। मलबा हटाने के प्राथमिकता के चलते इस संपत्ती का कोई सरकारी पंचनामा और ऑडिट किया गया है या नहीं इसके रेकॉर्ड को लेकर ठोस जानकारी नहीं है। स्थानीय लकड़ा व्यापारियों ने यह पूरा माल काट काटकर ट्रकों में भरकर कारखानों में स्टोर कर दिया। वन-विभाग और निगम के अधीन वृक्ष प्राधिकरण कमेटी द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग की कोई गतिविधि कहीं भी नजर नहीं आई। निजी, सार्वजनिक लकड़ा यातायात के लिए फॉरेस्ट की ओर से उचित राजस्व आंककर पासेस जारी की जाती है उक्त मामले में कितनी पासेस जारी हुईं अगर हुईं तो कितना राजस्व जमा हुआ इसकी भी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। वैसे भी रोजमर्रा होने वाली प्रत्यक्ष लकड़ा ट्रैफिकिंग और रेकॉर्ड को मेंटेन करने के लिए जारी की जाने वाली पासेस हेराफेरी कर सरकारी तिजोरी को चूना लगाया जाता है। चक्रवाती तूफान से क्षतिग्रस्त पेड़ों के आवाजाही के इस पूरे मामले की जिलाधिकारी द्वारा सघन जांच कराने की मांग की जा रही है।
