अविनाश द्विवेदी, भिंड ( मप्र ), NIT; 
रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर दोनों पक्षो ने जेल में गले मिलकर मिटाये गिले शिकवे, कई बार हो चुके थे समझौते के प्रयास
वर्ष 2010 में तत्कालीन पुलिस आईजी संजय झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री जगत राजपूत, एसपी राजेन्द्र कुमार ने भी समझौता का प्रयास कर चुके थे। इससे पहले वर्ष 2011में भी भिण्ड, ग्वालियर, मुरैना जिले के 5 सैकड़ा सामाजिक, राजनैतिक संगठन से जुड़े लोग समझौता का प्रयास किए थे पर सफलता नही मिली थी।
जिले की बहुचर्चित 45 वर्ष पुरानी दुश्मनी आज रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर समाप्त हुई। दोनों पक्ष जेल परिसर में ही गले मिले और भविष्य में मधुर संबंध बने रहने का वचन दिया। दोनों परिवारों की लगभग 100 बेटी व महिलाएं इस अवसर पर उपस्थित थीं। दोनों पक्षों की बेटियों ने जेल में बंद दोनों पक्षों के भाइयों की कलाई पर राखी बांधी तथा सभी भाइयों ने दोनों पक्षों की बहिनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। ग्राम डोंगरपुरा थाना बरोही निवासी चिम्मनसिंह व लालजीसिंह भदौरिया परिवारों के बीच तीन पीढियों यानी लगभग 47 वर्ष से भी अधिक समय से रंजिश चली आ रही थी। एक दूसरे के खून के प्यासे इन परिवारों के बीच अनेकों बार खूनी संघर्ष हो चुका है। कई बार ऐसा हुआ कि आमने सामने आते ही गोलियां बरसने लगीं। ऐसी घटनाएं ग्राम डोंगरपुरा के अतिरिक्त शहर में भी कई बार घटित हुईं।
वर्ष 1962 में सबसे पहले लालजी सिंह परिवार के अखयसिंह भदौरिया की हत्या हुई उसके बाद चिम्मनसिंह परिवार के नाथू सिंह, भगवान सिंह, फिर लालजी सिंह परिवार के राकेश उर्फ रक्के भदौरिया को गोली लगी। उसके बाद चिम्मन सिंह पक्ष के जुगराज सिंह को गोली लगी। वर्ष 2008 में लालजी सिंह पक्ष के जयसिंह भदौरिया को गोली लगी। महेश व सुरेश दोनों सगे भाईयों की इसी संघर्ष में जान चली गयी। लालजी सिंह पक्ष की ग्राम डोंगरपुरा में लगभग 300 बीघा कृषि भूमि दुश्मनी के कारण बंजर पड़ी है। दुश्मनी के कारण दोनों पक्षों की नव पीढ़ीयों के विरुद्ध दर्जनों मुकदमे रजिस्टर्ड हो गये थे। आने वाली पीढ़ी पर इसका असर पड़ रहा था। चिरकाल दुश्मनी ने दोनों परिवारों का विकास रोक रखा था। दोनों परिवारों के सदश्य भारी सुरक्षा में ही घर से निकल पाते थे। आने वाली पीढ़ी की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। दिनांक 28 जुलाई 2017 को भिण्ड न्यायालय ने हत्या के प्रयास के मामले में दोनों ओर से क्रॉस प्रकरण में एक पक्ष के लालजी सिंह,राकेश रकके ,व जितेंद्र तथा चिम्मन सिंह पक्ष के स्वम चिम्मन सिंह सहित रूपसिंह, बाबूसिंह, डब्बू उर्फ जुगराज, राजकुमार, दिनेश, फेरन सिंह, महेंद्रसिंह उर्फ मन्ना, दिलीपसिंह, शिवकुमार उर्फ मोनू सहित 10 लोगों को 7-7 वर्ष की सजा से दंडित किया था।
दोनों पक्षों ने जेल में एक साथ बैठकर मामला निपटा लिया और जेल परिसर के मंदिर पर दोनों पक्षों ने भविष्य में किसी तरह का कोई मनमुटाव ना रखने की शपथ ली और रक्षा बंधन के शुभ अवसर पर जेल प्रशाशन व मीडिया के समक्ष गले मिले। दोनों पक्षों ने एक दूसरे की बहिनों से राखी बंधाई। इस अवसर पर दोनों पक्षों के लगभग 100 सदस्य जेल ग्राउंड में मौजूद रहे। सभी की जुबां पर बस एक ही चर्चा थी कि जिले का बहुत बड़ी दुश्मनी निपट गयी, तो किसी को कहते सुना कि “क्या वर्षा जब कृषि सुखानी” फसल सूख जाने के बाद वर्षा होने से क्या फायदा।
