मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

भारतीय ख़ानक़ाही निज़ाम (व्यवस्था) में यूपी के देवा शरीफ की भारत प्रसिद्ध अध्यात्मिक शख्सियत देवा शरीफ, कुर्ला मुंबई और बुरहानपुर की दरगाहों के सज्जादा नशीन पीरे तरीकत हज़रत अल्लामा मौलाना अलहाज सैयद मोहम्मद फारूक मियां चिश्ती मिस्बाही क़ादरी फखरी निजामी क़िब्ला हुज़ूर साहब इन दिनों लगभग 10 दिनों से अधिक समय से बुरहानपुर प्रवास पर हैं और अभी लगभग 1 सप्ताह और बुरहानपुर में रहेंगे। इस दौरान एक मॉब के रूप में जनसाधारण सहित मुरीद, सभी सिलसिले के अकीदतमंद, आस्थावान लोग उनसे मिलने और उनका फैज़ हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में आस्ताना ए आलिया सिंधी बस्ती बुरहानपुर निरंतर पहुंच रहे हैं। जाहिर सी बात है कि जो हुजूर साहब फारूक मियां साहब से मिलने जाते हैं, या भेंट करने का शौक़ रखते हैं तो भारतीय परंपरा का निर्वाह करते हुए वे फूलहार (पुष्पा हार) या अन्य कोई सामग्री भी लेकर जाकर उन्हें भेंट करते हैं। इसी बात को महसूस करते हुए किबला हुजूर साहब हज़रत अल्लामा मौलाना अलहाज सैयद मोहम्मद फारूक मियां चिश्ती मिस्बाही क़ादरी फखरी निजामी ने अपना ख़ानक़ाही संदेश जारी करते हुए जनसाधारण से अपील की है कि “जो भी मुझसे मुलाकात के लिए आते हैं और मोहब्बत में गुलपोशी (पुष्पाहार/फूलहार) करते हैं उन्हें मेरी तरफ से यह नसीहत है कि वह जितनी कीमत (मूल्य) का हार मेरे लिए लाते हैं उतना ही पैसा किसी गरीब को हदीया कर दें (भेंट कर दें)। मज़ीद फरमाते हैं कि आपका लाया हुआ हार (पुष्प माला) मेरे गले में चंद सेकंड ही रहेगा, फिर बेकार हो जाएगा। अगर उसका पैसा किसी गरीब मुसतहिक़ को दे दें तो सवाब (पुण्य) भी मिलेगा और दुआ मिलेगी।
