नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सितंबर 2022 में 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता के बावजूद सरकार ने PWD को महज 29 करोड़ रुपए फंड रिलीज किया शेष 231 करोड़ रुपया लंबित होने के कारण जिले के विकासकों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। इस विषय को लेकर शासकीय कॉन्ट्रैक्टर संगठन ने संरक्षक मंत्री गुलाबराव पाटील और जिलाधिकारी अमन मित्तल के साथ साझा बैठक की जिसमें गौण खनिज के स्वामित्व को लेकर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद संगठन के प्रतिनिधि विधायक राजू भोले के साथ लोकनिर्माण मंत्री रविंद्र चव्हाण से मिले और लंबित फंड का ब्यौरा पेश किया। चव्हाण ने विषय की खास बात नोट कर वित्त विभाग की ओर रेफर किया। इसी दौरान ग्रामविकास मंत्री गिरीश महाजन ने इस मसले पर ध्यानाकर्षण का आश्वासन दिया। विदित हो कि फंड वितरण में शिंदे सरकार ने पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, नांदेड़, अहमदनगर, कोल्हापुर समेत अन्य जिलो को तरज़ीह दी है।

कॉन्ट्रैक्टर संगठन के इन गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अभिषेक कौल ने मीडिया को बताया कि लंबित फंड रिलीज न हुआ तो इसका सीधा असर जिले में चल रही विकास परियोजनाओ पर पड़ेगा। प्रतिनिधि मंडल मे मिलिंद अग्रवाल, स्वप्नेश बाहेती, प्रशांत महाजन, नितिन गोसावी, कैलास भोले, अनिल सोनवणे, नाना सोनवणे, राहुल तिवारी, भूषण पाटिल , राहुल सोनवणे समेत सदस्य मौजूद रहे . विदित हो कि कोरोना काल मे सूबे के तमाम विकास योजनाओ को तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार द्वारा लगाई गई कैची को लेकर गिरीश महाजन ने जमकर विरोध किया था. तब महाजन ने सरकार विरोधी हर एक आंदोलन मे ठेकेदारो की मन की बात को राजकोषीय धन तक पहुचाते हुए ठाकरेझं सरकार को लताड़ने का कोई मौका नही छोड़ा था . आज सूबे मे सरकार बदले चार महीने बीत चुके है शिंदे सरकार मे महाजन को तीन तीन विभागो का मंत्री बनाया गया है जिले मे दो कैबिनेट मंत्री है . विकास का लंबित आर्थिक अनुशेष काफी बड़ा है सरकारी देनदारी और लेनदारी काफी बड़ी है . विकास और राष्ट्रनिर्माण मे योगदान देने वाले इन ईमानदार कॉन्ट्रेक्टर संगठन जैसी अन्य इकाइयां सरकार मे जिले से शामिल मंत्रियो से यह आशा करती है कि उनकी सारी आर्थिक समस्याओ का समाधान आजादी के इस अमृत काल मे हो जाए ताकि विकास की गंगा बिना रुके अविरत बहती रहे जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति का अंत्योदय हो।
