वक्फ़ संपत्तियों की दुर्दशा का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार कौन, स्वयं वक़्फ़ बोर्ड या फिर मुस्लिम समाज? | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, देवबंद/भोपाल, NIT:

वक्फ़ संपत्तियों की दुर्दशा का सबसे बड़ा ज़िम्मेदार कौन, स्वयं वक़्फ़ बोर्ड या फिर मुस्लिम समाज? | New India Times

जमीअत उलेमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय प्रंबंधक कमेटी की बैठक दिनांक 28, 29 मई 2022 को देवबंद में आयोजित की गई। जिस में कई अहम प्रस्ताव पारित हुए। जमीअत उलामा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष हाजी हारून ने वक़्फ़ एक्ट से संबंधित प्रस्ताव पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वक्फ़ एक्ट 1954 भी जमीअत उलामा ए हिन्द के प्रयासों से बनाया गया था और उसके बाद लगातार उसमें जो कमियां थीं उसके संशोधन के प्रयास भी किये जाते रहे।
उन्होंने कहाँ की 1954 के वक्फ़ एक्ट में यह प्रावधान था कि जो वक़्फ एक्ट के तहत राज्यों में जहां वक़्फ़ बोर्ड का गठन किया जायेगा उनमें मुसलमानों के संगठनों के सदस्यों को प्रतिनिधित्व दिया जायेगा जिसमें ख़ासतौर पर जमीअत उलामा ए हिन्द का उल्लेख था बाद में यह शब्द एक्ट से खत्म कर दिया गया और आज स्थिति ये है कि जब वक़्फ़ बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की बात आती है तो संगठनों की बजाए संस्थाओं से सदस्यों का चुनाव कर लिया जाता है। उन्होनें कहा कि जिस मक़्सद के लिये वक़्फ़ बोर्ड के निर्माण के प्रयास किये गए थे उसमें निराशा ही हाथ लगी है।वक़्फ़ बोर्ड अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सका। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने तो यह समझा था कि वक़्फ़ बोर्ड के बनने से अब वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो गयी है लेकिन इसका उलट हुआ। हम बेफिक्र हो गए कि वक़्फ़ सुरक्षा के लिए कानून बन गया है लेकिन जब कानून को लागू करने की बात आती है तो हमें कहना पड़ेगा की वक़्फ़ बोर्ड वक़्फ़ संपत्तियों की लुटमार का अड्डा बन गया है जहां वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा नहीं बल्कि उसके साथ खिलवाड़ कर बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में जितनी भी वक़्फ़ संपत्तिया बर्बाद हो रही हैं वह वक़्फ़ बोर्ड के संरक्षण में ही हो रही हैं। देश की बेशुमार वक्फ़ संपत्तिया वक्फ़ बोर्ड के द्वारा बर्बाद कर दी गयी हैं. उन्होंने ख़ासतौर पर भोपाल का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल में 115 क़ब्रिस्तान थे जिनमें से आज सिर्फ 15 क़ब्रिस्तान ही बाकी बचे हैं ओर जो बचे भी हैं उनकी भी बहुत बुरी दुर्दशा है। उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा क़ब्रिस्तान बर्बाद हो गए जहां पर अतिक्रमण कर कालोनियां बना दी गयी हैं जिन पर वक़्फ़ बोर्ड ने कोई ध्यान नही दिया है।
वक़्फ़ बोर्ड सिर्फ उन संपत्तियों पर नज़र रखता है जहां से सिर्फ आमदनी हो सकती हो बाकी वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा की वक़्फ़ बोर्ड को कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि वक़्फ़ संपत्तियों की दुर्दशा और वक़्फ बोर्ड की निष्क्रियता की वजह से आज लोगों ने अपनी संपत्तियों को वक़्फ़ करना छोड़ दिया है जिसकी वजह से मुसलमानों की भलाई के लिए जो संपत्तिया वक़्फ़ की जाती थीं उनका रास्ता पूरी तरह से बंद हो रहा है इस लिये अब समय आ गया है कि कानून में फिर बदलाव किया जाए और वक़्फ़ बोर्ड को भी गुरु द्वारा प्रबंधक कमेटी के अनुरूप ही कानूनी मान्यता दी जाए। इस के इलावा उन्होंने कहा कि हमारी मांग है की पूरे भारत की वक़्फ संपत्तियों का सर्वे कराया जाए ताकि पता चल सके कि कितनी वक़्फ़ संपत्तिया बर्बाद हो चुकी हैं। इसी के साथ उन्होंने तमाम मुसलमानों खासतौर पर मुस्लिम नौजवानों से अपील की है कि वह अपनी वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा स्वयं करें और वक़्फ़ संपत्तियों को वक़्फ़ बोर्ड के भरोसे न छोड़ें, अगर हम अपनी वक़्फ़ संपत्तियों की सुरक्षा स्वयं करने लगे तो हम वक्फ संपत्तियों को बचा सकते हैं।

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