नरेंद्र कुमार, जामनेर/जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जामनेर लघु सिंचाई विभाग अपने प्रमुख के सनकी रवैय्ये से चर्चा का विषय बना है. विभाग के प्रमुख का नाम है वी पी पाटील जो कि उपविभागीय अभियंता के पद पर कार्यरत है. पाटील पूरे हफ्ते के पांच दिन के कामकाज में चार दिन जलगांव डिवीजन में बिताते हैं. अगर जामनेर आने का मन हुआ तो बृहस्पतिवार को पधारते हैं. लघु सिंचाई के अधिकार क्षेत्र में आने वाले छोटे बड़े डैम के विस्थापित किसानों को लाभक्षेत्र के दाखिलों के लिए तहसील के दूरदराज के गांवों से जामनेर आना पड़ता है. यह आना जाना भी तब फल पाता है जब पाटील दफ्तर आए हों अन्यथा नहीं. कई बार तो लाभक्षेत्र के दाखिलों के लिए किसानों को जलगांव डिवीजन जाकर पाटील से मिलना पड़ता है. इसमें किसानों को अपने विस्थापित होने पर समय और पैसों की बर्बादी की पीड़ा को झेलना पड़ता है. लघु सिंचाई के अधीन जो बांध हैं उनकी मरम्मत के लिए फाइल वर्क करने के लिए भी कमाल की लापरवाही बरती जा रही है जिसके कारण आए दिन अखबारों में बांधों के रखरखाव को लेकर खबरे छपती रहती हैं लेकिन पाटील के कान पर जूं तक नहीं रेंगती. पाटील के काम करने के तरीके से खुश होकर दो कर्मचारियों ने अपने तबादले करवा लिए हैं. सिंचाई विभाग के किसी भी विभाग में इतने सूचना अधिकार फाइल नहीं हुए होंगे जितने पाटील के आने के बाद लघु सिंचाई में हुए हैं. RTI का इतना फ्लो किस बात की ओर इशारा करता है, पारदर्शी प्रशासन की ओर या फिर प्रशासन के नाम पर चलाए जाने वाले कुशासन की ओर? वैसे बताया जा रहा है कि पाटील को रिटायर्ड होने को बस कुछ महीने बचे हैं तो इसका मतलब यह है क्या वरिष्ठ अधिकारियों की अपने ज्युनियर को लेकर प्रकट होने वाली अनुकंपा का खामियाजा जनता को भुगतना पड़े. लोगों की तरफ से यह मांग की जा रही है कि वी पी पाटील को तत्काल प्रभाव से डिवीजन में कहीं नियुक्त कर उनकी जगह पर दूसरे अधिकारी को तलब किया जाए.
