गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

यूपी सरकार मुक्त राशन के साथ गरीबों को 1 किलो खाद्य तेल 1 किलो नमक 1 किलो चना दे रही है. चुनाव से पहले यह सारे लाली पॉप घातक साबित हो सकते हैं. एक तरफ कह रहे हैं कि इस घोषणा का लाभ 15 करोड़ गरीबों को मिलेगा दूसरी ओर कह रहे हैं कि प्रदेश में गरीबी और बेरोजगारी नहीं है। मगर खाद्यान्न के साथ मिलने वाले नमक कि कितनी गुणवत्ता है यह तो नमक खाने वाले ही बता रहे हैं। अंबेडकर नगर में गरीबों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने की सरकारी योजना के तहत कोटे की दुकानों से गरीब उपभोक्ताओं को दिए जा रहे नमक में बालू और मोरंग मिला है। इसकी कई गरीब उपभोक्ताओं ने शिकायत की। नमक की पैकेट में मोरंग और बालू मिलने की शिकायत के बाद रियलिटी चेक किया गया, तो शिकायत की पुष्टि 100% सच साबित हुई है।
गरीबों को फ्री में बांटा जा रहा नमक
मोहल्ले में कई घरों से सरकारी नमक का पैकेट लेकर उसे बर्तन में रखकर पानी डाल कर घोला गया। घोलने के बाद उसे छाना गया, तो उसमें मोरंग और बालू मिला।
इस नमक के पैकेट पर खाद्य सुरक्षा गारण्टी की मोहर लगी है। ये भी लिखा है कि ये केवल सरकारी आपूर्ति के लिए है। यह नमक गरीबों को निशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने की योजना के तहत बांटा जा रहा है।
नमक के हर पैकेट पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की फोटो छपी है। जिससे उनका प्रचार हो रहा है। पैकेट पर सोच ईमानदार…काम दमदार का स्लोगन भी लिखा है, लेकिन इस फ्री का नमक वितरण गरीबों के जीवन से खिलवाड़ है।और बीमारियों का घर पैदा कर रहा है वैसे भी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी कारगर है सभी ने महामारी के दौरान देख लिया है। इस हाल में अगर लोग नमक खाकर बीमार होते हैं तो इलाज किस स्तर पर होगा यह सभी को पता है।
