पीयूष मिश्रा, सिवनी ( मप्र ), NIT;
म.प्र.की सबसे बडी ग्रामपंचायत छपारा जिस पर शायद उच्च अधिकारीयों का दबाब था की इस पंचायत में सबसे अधिक पौधे लगाये जायें, जिसके चलते पंचायत ने सैकडों गड्डे करवाये और पंद्राह सौ पौधे लगाने के चक्कर में ग्रामपंचायत के द्वारा शासकीय भूमि और निजी भूमि पर सैकड़ों पौधे रोपे उसके बाद भी अनुमानित संख्या को पार नही किया जा सका और जितने पौधे बचे सभी पौधों को लापरवाही के चलते डूब क्षेत्र कि भूमि में पौध-रोपण कार्य किया गया जो सिर्फ खानापूर्ति के सिवाह कुछ नही। ऐसी जगह पर पौधे लगाए गए जहां बैनगंगा नदी का पानी जुलाई अगस्त में तीन चार फिट पानी भरा रहता है। वहां पंचायत द्वारा एक फिट का पौधा लगा दिया गया। ऐसी जगह में लगे पौधे एक माह में तीन फुट की ऊचाई तय कर पायेगे ?
पौधे जहां जहां लगये वहां कि स्थिती देखते ही बन रही है। पंचायत के द्वारा शासकीय स्कूलों और कार्यालय व सार्वजनिक स्थल पर पौधे लगवाये गये। सुरक्षा के अभाव में एक दिन भी पूरे नही हुये और आधे से अधिक पौधे उजड गये। कुछ फलदार पौधे चोरी हो गये तो कुछ गाय बकरी के मुहं का निवाला बन गये, यदि समय रहते बचे पौधों की देखरेख नहीं की गयी तो शासन प्रशासन की योजना कागजों मे ही फलती फूलती रहेगी।
