रक्षा बंधन विशेष: सुभ महूर्त में बांधें अपने भाई की कलाई पर राखी | New India Times

संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

रक्षा बंधन विशेष: सुभ महूर्त में बांधें अपने भाई की कलाई पर राखी | New India Times

भाई और बहन के प्यार के प्रतीक रक्षा बंधन के पर्व को हर साल सावण मास के शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा वाले दिन मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 22 अगस्त दिन रविवार को मनाया जा रहा है। इस बार राखी पर कोरोना महामारी का भी कोई खास असर नहीं है अन्यथा पिछले साल बहुत से परिवारों में राखी का पर्व वर्चुअल तरीके से मनाया गया था। इसलिए भाई और बहनों का एक दूसरे के घरों में जाकर राखी बांधना इस बार संभव हो पा रहा है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है इस विषय को लेकर हमारे पन्ना संवाददाता संदीप तिवारी ने बात की शिव शक्ति आध्यात्मिक परामर्श केंद के प्रमुख चम्पतराय तिवारी जी से, आपने बताया कि हर बार रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों के मन में संशय बना रहता है। ज्योतिष शास्त्रानुसार प्रमुख रूप से भ्रद्राकाल और राहुकाल में राखी बांधने का शास्त्रों में निषेध बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रायां द्वे न कर्त्तव्ये, श्रावणी फाल्गुनी तथा।श्रावणी नृपतिं हन्ति, ग्रामं दहति पावकी।।अर्थात् श्रावण और फाल्गुनी महीने में पूर्णिमा के दिन यदि भद्रा काल हो तो दो काम बिलकुल भी नहीं करने चाहिए। श्रावण पूर्णिमा वाले दिन भद्राकाल में रक्षाबंधन नहीं करना चाहिए और फाल्गुन मास की पूर्णिमा में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। यदि श्रावण पूर्णिमा में रक्षाबंधन किया जाए तो वह राजा के लिए घातक होता है और यदि फाल्गुन की पूर्णिमा में भद्राकाल की अवधि में होलिका दहन किया जाए तो भी दोष लगता है ।वैसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पद, नाग और किस्तुघ्न, ये ग्यारह करण होते हैं। विष्टि का ही दूसरा नाम भद्रा है। काल की गणना में इन करणों का बहुत महत्व होता है। लेकिन पुराणों के अनुसार भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन बताया गया है। इसे भी अपने भाई शनि की तरह क्रूर माना जाता है। इसलिए भद्राकाल में शुभ कार्यों का निषेध बताया गया है। लेकिन भद्रा काल में तंत्र आदि का अनुष्ठान शुभ माना जाता है।लेकिन इस बार भद्रा काल राखी से अगले दिन यानी 23 अगस्त, सोमवार को सुबह साढ़े पांच बजे से सवा छह बजे तक रहेगा। इसलिए 22 अगस्त को राखी वाले दिन भद्रा का स्पर्श न होने से कोई संशय मन में नहीं रखना चाहिए। राहुकाल 22 अगस्त को शाम सवा पांच बजे से लगभग सात बजे तक रहेगा। इसलिए इन दोनों समयावधि को छोड़कर पूरा दिन अपनी सुविधानुसार राखी का पर्व मनाया जा सकता है। लेकिन फिर भी बहुत सारे लोग शुभ मुहूर्त के विषय में जानना चाहते हैं। उनकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार पूर्णिमा 21 अगस्त को शाम सात बजे आरंभ होगी और अगले दिन यानी 22 अगस्त की शाम साढ़े पांच बजे तक रहेगी।ज्योतिष के विद्वानों का मानना है कि इस बार रक्षा बंधन पर घनिष्ठा नक्षत्र और कुंभ राशि में चंद्रमा और गुरु के स्थित रहने के कारण गजकेसरी योग बनता दिखाई दे रहा है। ऐसा योग बहुत वर्षों बाद बन रहा है। इसलिए इन सब शास्त्रीय योगों को ध्यान में रखते हुए राखी का शुभ मुहूर्त प्रात: 9:35 बजे से 11:07 बजे के बीच और उसके बाद 11:57 बजे से 12:50 बजे के बीच अत्यंत ही शुभ माना जाएगा। जो लोग इस अवधि में राखी न बांध पाएं उन्हें भी चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। वे सुबह 6 बजे से लेकर रात 9 बजे तक राहुकाल (शाम 5:15 से 6:59) को छोड़कर कभी भी अपनी सुविधानुसार राखी बांध सकते हैं।

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