तानसेन समारोह में हुआ डॉ हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन | New India Times

डी.पी. दूबे/संदीप शुक्ला, ग्वालियर (मप्र), NIT:

तानसेन समारोह में हुआ डॉ हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन | New India Times

मध्यप्रदेश के ग्वालियर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के नाटक एवं रंगमंच संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक “रंग दृष्टि” का विमोचन तानसेन समारोह के अंतर्गत होने वाले वादी संवादी में हुआ।
भारतीय परंपरा में नाट्य समस्त कलाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। नाट्य कला ऐसी कला है जिसमें समस्त कलाओं का समावेश होता है। जब से विश्वविद्यालय शिक्षण पद्धति का सूत्रपात हुआ तभी से नाट्य प्रशिक्षण, शिक्षण संस्थानों, नाट्य समूह, नाट्य विभागों आदि की कक्षायें लगने लगी तथा नाट्य सिर्फ मंचन न करके विधिवत् उसके साहित्य पर भी पठन-पाठन शुरू हो गया।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रदर्शनकारी कलाओं नृत्य नाट्य व रंगमंच में यूजीसी नेट/जे.आर.एफ की परीक्षा होने लगी जिसके उपरांत आप उच्च स्तर के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए सक्षम जाते हैं साथ ही यह रंगमंच में शिक्षा के व्यवसायिक स्तर पर सहायक प्राध्यापक बनने का रास्ता भी साफ करता है परंतु अभी तक इस विषय पर कोई किताब नहीं थी लेकिन अब यह कमी डॉ हिमांशु द्विवेदी की पुस्तक “रंग दृष्टि” (यूजीसी नेट नृत्य नाट्य रंगमंच) ने पूरी कर दी।
यह बात डॉ हिमांशु द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक “रंग दृष्टि” के विमोचन के अवसर पर विश्वविद्यालय के नाटक एवं रंगमंच संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ हिमांशु द्विवेदी ने कही।
इस अवसर पर डॉ हिमांशु द्विवेदी ने कहा नृत्य रंगमंच पर वैसे तो अनेको किताबें है। परन्तु विषय के अनुसार नही है इसलिए इस पुस्तक के लिखने के पीछे मेरा प्रयोजन छात्रों के पाठ्यक्रम के अनुसार सरल शब्दों में सामग्री उपलब्ध करवाना है।
यह पुस्तक नृत्य, नाट्य एवं रंगमंच के स्नातक स्नातकोत्तर एवं जो छात्र-छात्रायें यूजीसी -नेट/स्लेट/जे.आर.एफ, की तैयारी कर रहे है उनको ध्यान में रखकर सरल भाषा में लिखने का प्रयत्न किया है। अंग्रेजी के समानार्थी शब्दों का भी सरल प्रयोग किया है। विषय को समझाने की दृष्टि से थोड़ा विस्तार भी किया है।
नाट्य रंगमंच बहुत ही विशद और व्यापक विषय है। सभी विषयों का समावेश करना इस पुस्तक में संभव नहीं था। इसलिए मैंने इसे तीन पुस्तकों के रूप में प्रकाशित करने का फैसला किया जो मेरे गुरुजनों के आर्शीवाद से सम्पूर्ण भारतवर्ष की प्रथम पुस्तक लिखने जा गौरव प्राप्त हुआ, जिसे में अपनी अलग-अलग पुस्तकों में यू.जी.सी. नेट के पाठ्यक्रम को समेटने की कोशिश की यू.जी.सी. नेट में नाट्यशास्त्र, संस्कृत नाटक, दशरूपक आदि विषयों एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली एकादश नाट्य संग्रह की मैंने अपनी “ग्यारह नाट्य संग्रह (एकादश नाट्य संग्रह)” में समेटने का प्रयत्न किया है। रंग दृष्टि पुस्तक में रामायण, महाभारत, शिल्पादीकारम आदि अन्य महत्वपूर्ण महाकाव्य का संक्षिप्त परिचय, प्रमुख नाटककार व उनके नाटक (भाषाई आधार पर), प्रमुख पत्रिकायें, समारोह, रंग समूह, संस्कृति केन्द्र, रंगमंच और नृत्य से संबंधित महत्वपूर्ण सम्मान, लोकनाट्य परिचय, भारतीय नृत्य कला परिचय आदि विषयों को इस पुस्तक में समावेश किया है था इसके अंतिम अध्याय में नृत्य, नाट्य रंगमंच विषय तथ्य
दिये है , जो यू.जी.सी. नेट की तैयारी में बहुत लाभदायक होंगे।
उक्त पुस्तक में यूजीसी. नेट (नृत्य/नाट्य/रंगमंच) के वस्तुनिष्ठ सामग्री का चयन करने के काफी समय लगा. यह पुस्तक न केवल यू.जी.सी. नेट अपितु एफ.टी.आई.आई. आदि की तैयारी के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इसका नाम दृष्टि भी इसलिए रखा क्योंकि यह रंगमंच अर्थात समस्त कलायें दृश्य और श्रव्य के प्रति छात्रों एवं अध्येताओं में एक दृष्टि पैदा करता है।
डॉ हिमांशु द्विवेदी ने भारतवर्ष की यूजीसी नेट नृत्य नाट्य रंगमंच की पहली पुस्तक लिखी जिससे विद्यार्थियों ने लाभ प्राप्त किया है और उनका यूजीसी नेट भी क्वालीफाई हुआ है आज विश्वविद्यालय के विभाग से लगातार यूजीसी नेट क्वालीफाई हो रहे हैं अभी तक डॉ हिमांशु द्विवेदी के मार्गदर्शन में 25 से अधिक छात्र-छात्राओं का यूजीसी नेट क्वालीफाई हो चुका है विमोचन के अवसर पर संस्कार भारती के संस्थापक एवं संरक्षक योगेंद्र जी बाबा राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद झा जी सहित कुलपति प्रोफेसर पंडित साहित्य कुमार नाहर ,कुलसचिव डॉक्टर कृष्ण कांत शर्मा और वित्त नियंत्रक दिनेश पाठक ने डॉक्टर द्विवेदी शुभकामनाएं प्रेषित की।

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