स्नेह लता बहन वागरेचा का हुआ साल श्रीफल से सम्मान, स्नेह लता बहन वागरेचा ने किया 91 उपवास का पारना, पूर्व में 111 उपवास करने के लिए लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में पहले ही है नाम दर्ज | New India Times

रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT

स्नेह लता बहन वागरेचा का हुआ साल श्रीफल से सम्मान, स्नेह लता बहन वागरेचा ने किया 91 उपवास का पारना, पूर्व में 111 उपवास करने के लिए लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में पहले ही है नाम दर्ज | New India Times

मेघनगर अणु स्वाध्याय भवन पर विराजित पू. पुण्यशीलाजी म.सा.आदि ठाणा के सानिध्य में चली धर्म आराधना में दीर्घ तप आराधना करने वाली बहन स्नेहलता हँसमुखलाल वागरेचा ने 91 उपवास का पारना अपने निवास पर किया।

गौ रक्षा वाहिनी के जिला अध्यक्ष राजू धानक की टीम के साथ मोहन भाई चोहान, जवसीग भाई परमार, नाना भाई अमलियार,
पत्रकार रहीम शेरानी हिंदुस्तानी, रोटरी क्लब अपना के भरत मिस्त्री, रोटरी क्लब अपना के पूर्व अध्यक्ष मांगीलाल नायक, राजेश भंडारी, पंकज वागरेचा, कयूम खान, आदी ने स्नेहलता बहन बागरेचा के निवास पर पहुंचकर साल श्रीफल से सम्मान कर उनसे आशीर्वाद लिया !

बताया गया है की स्नेहलता बहन वागरेचा ने पूर्व में कई बार दीर्घ तप किये है।

बुद्धपुत्र प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनि जी म.सा. के 2017 के वर्षावास में आपने 111 उपवास की उग्र तपस्या की थी।

तब उन्हें लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में यह कीर्तिमान आपने नाम दर्ज किया गया था।

वर्तमान में थांदला विराजित श्रमण संघ के प्रवर्तक पूज्य गुरु भगवंत श्री जिनेन्द्रमुनि जी म.सा. के मुखारविंद से आपने 91 वे उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए थे।

गर्म जल के आधार पर ही किया जाता है तप

जैन धर्म में सिर्फ गर्म जल के आधार पर तप किया जाता है।

इसमें भी सूर्यास्त के पश्चात से लेकर सूर्योदय होने के बाद 48 मिनट तक जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है।

इतनी दीर्घ तपाराधना सिर्फ गर्म जल के आधार पर ही करना बहुत कठिन है।

लगातार तीन माह तक तप करने वाले साधक विरले ही होते हैं।

इसी क्रम में मेघनगर श्रीसंघ में शशि बहन नांदेचा 23, चांदमल चोरडिया 19 और कश्मीरा डोशी ने 18 ने उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।

इस उपलक्ष्य में हंसमुखलाल मिश्रीमल वागरेचा परिवार ने प्रभावना का लाभ लिया।

By nit

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