भ्रष्टाचार का प्रकोप: मुख्यमंत्री से भी नहीं मिला इंसाफ तो ठेकेदार ने कर ली आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखी पूरी कहानी | New India Times

संदीप शुक्ला, ग्वालियर ( मप्र ), NIT; ​
भ्रष्टाचार का प्रकोप: मुख्यमंत्री से भी नहीं मिला इंसाफ तो ठेकेदार ने कर ली आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखी पूरी कहानी | New India Timesबिजली कंपनी के लिए ठेकेदार रवीन्द्र सिंह जादौन ने लाखों के काम किए, लेकिन उसने उनका पेमेंट नहीं किया। 9 साल से अपना 5 लाख रुपए का बकाया मांगते हुए जादौन परेशान हो गए और उन्होंने मंगलवार की शाम को सीजीएम दफ्तर में पहुंचकर जहर खाकर आत्महत्या कर लिया।

सुसाइड करने से पहले उन्होंने एक नोट पूरे सरकारी सिस्टम की दास्तान लिखी और कहा कि मेरा अंतिम संस्कार सरकारी खर्चे पर कर दिया जाए।

  •  यह है मामला……..

-रवीन्द्र सिंह ने 9 साल पहले बिजली कंपनी के लिए घर से बाहर मीटर व केबल लगाने का काम किया था। इस काम में 5 लाख रुपए का भुगतान शेष था । इस पेमेंट के लिए जादौन ने बिजली कंपनी के दफ्तर के सैकड़ों चक्कर काटे।
-सीजीएम दफ्तर में पदस्थ बाबू ने 25 फीसदी कमीशन मांगा, लेकिन जादौन 10 प्रतिशत से ज्यादा देने के तैयार नहीं थे। इसलिए कंपनी ने भुगतान नहीं किया।
-जादौन ने सीएम तक से इसकी शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला और उनकी आर्थिक हालत खराब होती गई। पत्नी को एक फैक्ट्री में मजदूरी करनी पड़ी।

-मंगलवार की शाम को वो मोतीझील स्थित बिजली कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर के दफ्तर पहुंचे और वहां जहर खाकर सुसाइड कर लिया।
-मरने से पहले दफ्तर में ही एक कागज पर सुसाइड नोट लिखा। जिसमें उनके संघर्ष की पूरी कहना थी। 
-अपने भुगतान के लिए वह इतनी लिखापढ़ी कर चुके थे, जिससे कागजातों से अटैची भर गई थी। उन्होंने सुसाइड नोट में बिजली कंपनी से भुगतान न होने की पीड़ा लिखी है।​
भ्रष्टाचार का प्रकोप: मुख्यमंत्री से भी नहीं मिला इंसाफ तो ठेकेदार ने कर ली आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखी पूरी कहानी | New India Times

  • यह लिखा सुसाइड नोट में…..

-जिन लोगों ने मेरे साथ धोखाधड़ी कर आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया है। उन सभी से संबंधित दस्तावेजों की छायाप्रति मेरे साथ जो पॉलीथिन बैग है, उसमें रखी है। मैं कई सालों से आत्महत्या करने की सोच रहा था।
– मेरी पत्नी की दो बड़ी बहनों ने मेरी आर्थिक मदद की। कभी उन्होंने अपने मकान में रहने की व्यवस्था की और जब मैं किराए के मकान में रहा तो उन्होंने खाने पीने सहित अन्य जरूरतों के साथ मकान किराए की व्यवस्था भी की। जिससे मैं इतने समय तक जीवित रहा।
-अभी तक मुझे आशा थी कि मेरा जिन लोगों पर पैसा है, वह मिल जाएगा तथा मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड से भुगतान हो जाएगा। लेकिन अब मेरी सभी आशाएं टूट गईं हैं।
-अभी बीमारी की हालत में मेरी पत्नी एक हैंडलूम फैक्टरी में 65 रुपए रोज की मजदूरी पर काम करने जाती है। उससे 1500 रुपए प्रतिमाह का मकान किराया निकल जाता है। वर्तमान में वह दो गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। जिसकी मेडिकल जांच कराई जा सकती है।
-मैंने गरीबी रेखा का राशन कार्ड बनवाने के लिए फार्म भरा था। लेकिन दो हजार रुपए रिश्वत न देने के कारण मेरा फार्म निरस्त कर दिया गया। मेरे सभी मूल दस्तावेजों की मूल प्रतियां मेरे घर में एक अटैची में रखी हैं।
 -मैं सुसाइड नोट में ज्यादा कुछ नहीं लिखना चाहता हूं। क्योंकि मैं जिन कारणों से सुसाइड कर रहा हूं, उन सभी से संबंधित समस्त दस्तावेज अलग से प्रस्तुत हैं।
मेरी पत्नी के पास एक पैसा भी नहीं है। कृपया मेरे मृत शरीर को शासकीय खर्च से ठिकाने लगा दिया जाए। नहीं तो उनको रिश्तेदारों से उधार लेने पड़ेंगे। रुपए वापस करने की उनके पास कोई व्यवस्था नहीं है। 
मेरे दस्तावेजों के साथ निम्न दो दस्तावेज संलग्न हैं।
1. 8 पृष्ठीय शिकायती आवेदन। 

2. 51 पृष्ठीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जवाब दें। 

प्रार्थी – रवींद्र सिंह जादौन।।

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